उत्तर प्रदेश में दिखी बदलाव की बयार
रणनीतिकारों का कहना है कि यूपी के पहले चरण के मतदान ने यह संकेत दे दिया है कि अब यूपी का मतदाता उदासीन नहीं रहा। वह भी जागरूक हो गया है इससे उन उम्मीदवारों के लिए खतरे की घंटी बज गई है जो महज 20-22 फीसदी वोट लेकर विधानसभा में आ धमकते हैं। आशा यह भी जताई जा रही है कि बाकी के छह चरणों में मतदान 65 फीसदी को भी पार कर सकता है। पहले चरण के साथ ही आयोग अपनी पीठ थपथपाने लगा है।
दरअसल, पहले चरण के मतदान ने सबको उत्साहित कर दिया है। बुधवार की सुबह बारिश के बावजूद मतदाताओं ने पिछला रिकार्ड तोड़ दिया। पिछले विधानसभा चुनाव में हुए मतदान के मुकाबले इस बार 33 फीसदी ज्यादा वोटिंग हुई है। आयोग के उप आयुक्त आलोक शुक्ला और डीडीजी अक्षय राउत ने इसके साथ ही यह आशा भी जता दी कि अगले चरणों में मतदान में और बढ़ोत्तरी होगी। उनकी आशा के पीछे तर्क भी है।
गौरतलब है कि इस बार उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में लगभग दो करोड़ नए वोटर जुड़े हैं। तकरीबन साठ लाख ऐसे वोटर हैं जो अभी 18-19 आयु वर्ग के हैं और पहला मतदान करने से चूकना नहीं चाहते हैं। वहीं गैर सरकारी संगठनों के जनजागरण के साथ-साथ आयोग ने भी ठोस कदम उठाए हैं। इसमें खास तौर पर एसएमएस व्यवस्था ने मतदाताओं को उत्साहित किया है। यह व्यवस्था उन मतदाताओं को भी मतकेंद्र तक खींच लाई जिनके पास अपने केंद्र की जानकारी नहीं थी। वोटर स्लिप, कॉल सेंटर जैसी कई दूसरी व्यवस्थाओं ने भी इस बार के चुनाव में कमाल दिखाया है। बहरहाल, राज्य की 55 सीटों पर शांतिपूर्ण मतदान के बावजूद चुनौतियां कम नहीं हैं। दरअसल पूरे उत्तर प्रदेश में अब तक जिन 15 लाख से ज्यादा संदिग्धों को पकड़ा गया है उनसे में दो लाख से कुछ ज्यादा इन सीटों वाले क्षेत्रों के हैं।













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