यूपी चुनाव: बदली सीमाओं और ज्यादा वोटिंग से बदलेंगे नतीजे?

पहले चरण की वोटिंग में वोटिंग 60 फीसदी से भी अधिक रही है। अधिक वोटिंग से समाजवादी पार्टी फायदे में दिखाई दे रही है। चुनावी क्षेत्र की सीमा बदलने का फायदा 2009 में कांग्रेस को सबसे ज्यादा हुआ था। जरा देखिए कि नई निर्धारित सीमा वाली विधानसभा क्षेत्रों में इस बार नतीजे क्या रहते हैं।
विधानसभा संख्या 145. महोली – नई निर्धारित विधानसभा क्षेत्र. 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में 60 फीसदी वोटिंग हुई थी। जिसमें कांग्रेस को भारी बढ़त मिली थी।
146. सीतापुर – इससे पहले 1996 में 60 फीसदी मतदान हुआ था और इस दौरान फायदा समाजवादी पार्टी को हुआ था।
147. हरगांव– 1996 में यहां 64 फीसदी मतदान हुआ था और सपा ने बढ़त बनाई थी।
148. लहरपुर – यहां हमेशा औसत से ज्यादा मतदान होता है और यहां सपा और बसपा 1996 और 2002 में आगे रही थीं।
149. बिसवां – यहां 1993 से लेकर 2002 तक औसम मतदान से ज्यादा वेटिंग हुई है। इस दौरान सपा और भाजपा बढ़त बनाने में कामयाब रही।
150. सेवाता – नई नई निर्धारित चुनावी क्षेत्र में 2009 में लोकसभा चुनाव के दौरान 57 फीसदी मतदान हुआ था जिसमें बसपा आगे रही थी।
151. महमूदाबाद– यहां हमेशा ही मतदान भारी संख्या में होता है और टक्कर कांग्रेस और भाजपा के बीच ही होती है।
152. सिंधौली – यहां भी बेहतर मतदान होता है और ज्यादातर मौकों पर सपा बढ़त में रही है।
153. मिश्रिख – भारी मतदान में हमेशा सपा बढ़त बनाती है।
266. कुर्सी – नए नई निर्धारित चुनावी क्षेत्र में 2009 में हुए लोकसभा में कांग्रेस को भारी बढ़त मिली थी और यहां 52 फीसदी मतदान हुआ था।
267. राम नगर – यहां सपा और भाजपा ही बढ़त बनाने में कामयाब रही हैं।
268. बाराबंकी – इस नए नई निर्धारित चुनावी क्षेत्र में 2009 में लोकसभा के चुनाव के दौरान कांग्रेस को भारी समर्थन मिला था। यहां उस समय 52 फीसदी मतदान हुआ था।
269. जैदपुर – यह भी नया नई निर्धारित चुनावी क्षेत्र है और यहां भी 52 फीसदी मतदान पिछली हुआ और कांग्रेस फायदे में रही थी।
270. दरियाबाद– यहां हमेशा ही औसत से ज्यादा वोटिंग होती है और भाजपा को फायदा मिलता है।
271. रुदौली– यहां लगभग 60 फीसदी तक मतदान हुआ है और 1993 और 2002 में सपा को फायदा हुआ।
272. हैदरगढ़– यहां कभी भी 58 फीसदी से ज्यादा वोटिंग नहीं हुई है और भाजपा और कांग्रेस बढ़त बनाती हैं।
273. मिल्कीपुर – यहां कभी भी 58 फीसदी से ज्यादा मतदान नहीं हुआ है और फायदे में हमेशा सपा रही है।
274. बीकापुर - यहां भी कभी 58 फीसदी से ज्यादा मतदान नहीं हुआ है और फायदे में हमेशा सपा रही है।
275. अयोध्या – यहां कभी 57 फीसदी से ज्यादा मतदान नहीं हुआ है और फायदे में हमेशा भाजपा रही है।
276. गोशाई गंज – नई नई निर्धारित चुनावी क्षेत्र में 2009 में हुए लोकसभा चुनावों में बहुत कम अंतर से भाजपा आगे रही थी।
277. कटेहरी– 1996 में यहां 60 फीसदी मतदान हुआ और बसपा ने बढ़त बनाई।
278. टंडा – यहां हमेशा अच्छी खासी वोटिंग होती है और बसपा फायदे में रहती है।
279. आलापुर – नई नई निर्धारित इस चुनावी मैदान में पिछली बार 47 फीसदी मतदान हुआ था और फायदे में बसपा रही थी।
280. जलालपुर – यहां मुकाबला हमेशा भाजपा, कांग्रेस और सपा के बीच रहता है।
281. अकबरपुर – इस सीट पर हमेशा से बसपा मजबूत स्थिति में रही है।
282. बाल्हा– पिछली बार यहां केवल 40 फीसदी मतदान हुआ था और फायदा कांग्रेस को हुआ था।
283. नानपारा – यहां औसतन 50 फीसदी तक मतदान होता है और फायदा भाजपा को होता है।
284. मटेरा- नई नई निर्धारित चुनावी क्षेत्र में 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में 40 फीसदी वोटिंग हुई थी और फायदा कांग्रेस को हुआ था।
285. महासी – 60% फीसदी के साथ 1996 में फायदा सपा को हुआ।
286. बहराइच – 59% फीसदी मतदान के साथ 1996 में कांग्रेस को फायदा मिला।
287. पयागपुर – 2009 में यहां 40 फीसदी मतदान हुआ और सपा को फायादा हुआ।
288. केसरगंज – यहां लगभग 50 फीसदी मतदान रहता है और फायदा सपा को होता है।
289. भिंगा – यहां हमेशा ही भाजपा फायदे में रहती है।
290. श्रावस्ती – नई सीमा निर्धारित सीट में यहां 2009 में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस फायदे में रही थी और यहां लगभग 40 फीसदी मतदान रहा था।
291. तुलसीपुर – यहां हर बार लगभग 60 फीसदी तक मतदान रहता है और सपा व बसपा फायदे में रहती हैं।
292. गेनसारी – 60 फीसदी तक मतदान के साथ यहां सपा और भाजपा में टक्कर रहती है।
293. उतरौला – यहां कभी भी 55 फीसदी से अधिक मतदान नहीं हुआ है और सपा बढ़त बनाती है।
294. बलरामपुर – 55 फीसदी के साथ यहां सपा और कांग्रेस के बीच टक्कर होती है।
295. मेहनौन – नई निर्धारित सीट में 2009 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को फायदा हुआ औश्र यहां 40 फीसदी वोटिंग हुई।
296. गोंडा – यहां कभी भी 50 फीसदी से अधिक मतदान नहीं हुआ है। सपा बढ़त बनाने में कामयाब रही है।
297. कटरा बाजार – यहां मुकाबला सपा और भाजपा के बीच रहा है और मतदान 54 फीसदी तक रहता है।
298. कालोनीगंज – यहां मुकाबला बसपा और सपा के बीच रहता है और मतदान औसतन 53 फीसदी तक रहता है।
299. तराबगंज – नई निर्धारित चुनावी सीमा में 2009 में लोकसभा चुनावों में सपा को फायदा मिला था और यहां 40 फीसदी मतदान हुआ था।
300. मानकपुर (एससी) – यहां सर्वाधिक वोटिंग 59 फीसदी 1989 में हुई थी। जिसके बाद यहां कभी भी 53 फीसदी से अधिक मतदान नहीं हुआ और सपा ने कांग्रेस पर बढ़त बना ली।
301. गौरा – इस चुनावी मैदान की भी सीमा लोकसभा के 2009 के चुनाव में बदली गई थी। यहां केवल 40 फीसदी मतदान हुआ और कांग्रेस फायदे में रही थी।
302. शोहराथगढ़ – यहां 60 फीसदी औसतन मतदान होता है और 1990 में बीजेपी फायदे में थी बाद में कांग्रेस ने बढ़त बना ली।
303. कपिलवस्तु – यहां पिछली बार 49 फीसदी वोटिंग हुई और भाजपा को फायदा हुआ।
304. बंसी – यहां मतदान 50 से 60 फीसदी रहता है और भाजपा फायदे में रहती है।
305. इटवा – यहां मतदान औसतन अधिक रहता है और कई पार्टियों को फायदा अभी तक मिला है। 1993 में भाजपा फायदे में रही थी।
306. डोमरियागंज – यहां 1993 में सबसे ज्यादा वोटिंग रिकॉर्ड की गई थी। तभी से भाजपा की बढ़त सपा के हिस्से में जा पहुंची है।
307. हरैया – 50 फीसदी बढ़त के साथ यहां भाजपा से बढ़त बसपा के पास पहुंच गई है।
308. कप्तानगंज – यहां 2002 में 62 फीसदी मतदान हुआ और सीट सपा, बीएसपी और भाजपा के बीच घूमती रहती है।
309. रुधौली – यहां टक्कर सपा और भाजपा के बीच होती है और मतदान 50 फीसदी तक होता है।
310. बस्ती सरदार – नई निर्धारित सीट में कांग्रेस का सिक्का रहा है। 2009 में इस सीट पर जब 49 फीसदी मतदान हुआ था तो बसपा के हिस्से में सीट गई थी।
311. महादेवा - नई सीमा निर्धारित इस सीट पर 2009 में लोकसभा चुनाव में 49 फीसदी मतदान के साथ बसपा बढ़त बनाने में कामयाब रही थी।
यह लेख ऑफस्टम्प्ड के ब्लॉग पोस्ट से अनुवादित है।












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