अखिलेश दास को मिस कर रहे लखनऊ के मतदाता

आप सोच रहे होंगे कि अखिलेश दास तो बसपा का जोर-शोर से प्रचार कर रहे हैं, तो लखनऊवासी इन्हें मिस कैसे कर सकते हैं? जवाब हमारे पास है। असल में लखनऊवासी इस बार बच्चों को दिये जाने वाले पेंसिल बॉक्स, घरों में इस्तेमाल होने वाले किचन आईटम, ग्रीटिंग कार्ड्स, त्योहार के पहले उपहारों के ऊपर लगी स्लिप और मिठाईयों के डिब्बों के रूप में उन्हें मिस कर रहे हैं।
इसे विस्तार से बताने के लिए हम आपको ले चलते हैं 2008 के आम चुनावों में, जिसमें अखिलेश दास ने बसपा से चुनाव लड़ा था। चुनाव की अधिसूचना जारी होने के पहले ही लखनऊ के पूर्व मेयर ने पूरे शहर में बच्चों को पेंसिल बॉक्स बंटवाये। ईद हुई तो मुस्लिमों के घर-घर सिवाईयां और दीवाली हुई तो हिन्दुओं के घर पटाखे भिजवाये। अन्य त्योहारों पर लड्डू और न्यू-ईयर व क्रिसमस पर ग्रीटिंग कार्ड। इन सभी उपहारों पर सिर्फ तीन तस्वीरें होती थीं मायावती, अखिलेश दास और हाथी।
इस साल विधानसभा चुनाव में बसपा का ऐसा कोई प्रचार नहीं दिखा। इसका कारण यह भी हो सकता है कि चुनाव आयोग ने समय से पहले चुनाव करा दिये और बसपा को यह सब करने का मौका ही नहीं मिला। चूंकि आचार संहिता लागू है, इसलिए अब कोई उपहार नहीं दिये जा सकते हैं।












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