फलक की जिंदगी नरक बनाने वाले गिरफ्तार

Police
दिल्ली (ब्यूरो)। पुलिस ने फलक की जिंदगी नरक बनाने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। उसमें उसका जालिम पिता भी शामिल है। देह व्यापार में धकेलने वाला और दुष्कर्म के आरोपी संदीप पांडेय और उसकी पत्नी पूजा भी अब पुलिस की गिरफ्त में हैं। फलक की असली मां मुन्नी को गिरफ्तार नहीं किया गया था। पुलिस टीम बिहार गई है। पुलिस जल्द ही असली मां तक पहुंच जाएगी।

उधर, एम्स ट्रामा सेंटर में मौत से मुकाबला कर रही दो साल की फलक के मस्तिष्क से लगातार पानी निकलने से डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई है। पुलिस का कहना है मामले में अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है, जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस आयुक्त बीके गुप्ता ने कहा कि किशोरी ने राजकुमार के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया है। फलक को एम्स में भर्ती कराने वाली लीला (बदला हुआ नाम) को घर में अपनों से यातनाएं मिली। इनसे बचने के लिए वह निकली तो बाहर उसे दरिंदे मिले। उसका जगह-जगह शारीरिक शोषण हुआ।

लीला के बयान के बाद पुलिस ने राधा के पिता मोहन गुप्ता, संदीप पांडेय और पूजा को गिरफ्तार किया है। वहीं अजय चौधरी ने मीडिया के माध्यम से फलक के असली माता-पिता से आग्रह किया है वह सामने आए और बच्ची को अपनाएं। पुलिस लीला के पिता मोहन को लीला की इस दुर्दशा के लिए पूरी तरह जिम्मेदार मान रही है। उसके खिलाफ लीला को मारने-पीटने, प्रताड़ित करने और गाली-गलौच करने का मामला दर्ज कर लिया गया है। मोहन ने लीला की मां से 1993 में शादी की थी।

पांच-छह साल पहले उसकी मौत हो गई थी। कालकाजी थाना इलाके में हत्या के मामले में मोहन जेल जा चुका है और हाल ही में जमानत पर आया है। गोविंदपुरी झुग्गी बस्ती निवासी संदीप (32) मूलत: जैठा, एटा (यूपी) का रहने वाला है। करीब चार साल पहले संदीप की पूजा से शादी हुई थी। संदीप लीला के साथ बार-बार दुष्कर्म करने और यातनाएं देने का आरोपी है। सोनागाछी, कोलकाता निवासी पूजा पर राधा को देह व्यापार में धकेलने के प्रयास का आरोप है। पूजा के कहने पर पति संदीप ने लीला से दुष्कर्म किया। उधर एम्स ट्रामा सेंटर में जिंदगी और मौत से जूझ रही दो साल की फलक के मस्तिष्क से लगातार पानी निकलने से डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई है। 48 घंटे ठीक ठाक गुजर जाए इसकी प्रार्थना डॉक्टर भी कर रहे हैं। हालांकि फलक हाथ पैर हिला रही है और आंख खोल रही है। लेकिन डॉक्टर इस बात से बेहद चिंतित हैं कि उसके मस्तिष्क का संक्रमण समाप्त नहीं हो रहा है।

ट्रामा सेंटर प्रमुख डॉ.एम.सी. मिश्रा का कहना है कि कल्चर रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। जिसके कारण एंटीबायोटिक के बारे में फैसला नहीं लिया जा सका है। फलक पर एंटीबायोटिक अब असर नहीं कर रहा है। ट्रामा सेंटर के न्यूरोसर्जन डॉ.सुमित सिन्हा का कहना है कि बच्ची के सिर से हर आधा घंटे पर पाइप के सहारे पानी निकालना पड़ रहा है। ज्यादा तरल पदार्थ बनने के कारण उसकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। फिलहाल वह वेंटिलेटर पर है और उसकी सेहत सुधारने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं। संक्रमण समाप्त हो जाने के बाद ही बेहतर उम्मीद की जा सकती है।

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