यूपी का सीएम तो कोई कांग्रेसी ही होगा!

अंकुर शर्मा
चुनावी समर के बीच में हर न्यूज चैनल और अखबार वालों ने अपने-अपने कयास लगाये हैं। किसी का ओपनिंग पोल कहता है कि यूपी में फिर से मायावती की वापसी होगी तो कोई कहता है कि मुलायम की सरकार बनेंगी।

आज हम आपको किसी का ओपनिंग पोल नहीं बताने वाले हैं बल्कि उन लोगों की बात आप तक पहुंचायेंगे जो राजनीति की अच्छी जानकारी तो रखते हैं लेकिन ना तो उन्होंने कहीं कोई सर्व कराया है और ना ही वो किसी मीडिया तंत्र से जुड़े हुए हैं। लेकिन यह लोग जिंदगी को करीब से देखने वाले समाज के वो बुद्धिजीवी हैं जिन्होंने देश की राजनीति में आये बदलाव को पिछले साठ सालों में महसूस किया है।

काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के सेवानिवृत्त अध्यापक वी सी पाठक, 'आज' न्यूज में संपादन का काम कर चुके रिटायर्ड आर के मिश्रा और समाज के कर्णधार यानी यूपी कॉलेज बनारस के छात्रगणों की चर्चा कहती है कि इस बार यूपी की सत्ता किसी कांग्रेसी के ही हाथ में होगी। हालांकि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा लेकिन इस बार के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बसपा ही रहेगी।

जबकि दूसरे नंबर पर रहेगी मु्लायम की साईकिल, वहीं राहुल का जादू भी यूपी में काम करेगा इसलिए पिछले 22 सालों से अपनी बारी की प्रतिक्षा कर रही कांग्रेस को चुनाव में अच्छी-खासी सीट मिलेगी जबकि चौथा नंबर अपने कर्मों के चलते भाजपा का रहेगा। इसलिए सरकार बनाने का अवसर मुलायम सिंह को मिलेगा क्योंकि कांग्रेस अगर समर्थन देगी तो वो केवल सपा को ही, ना तो वो भाजपा से हाथ मिलायेगी और ना ही बसपा से।

भाजपा भी बसपा के साथ गठजोड़ नहीं करेगी क्योंकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीन गडकरी ने एक निजी टीवी चैनल पर सार्वजनिक रूप से कसम खायी है कि भले ही भाजपा को यूपी में हार झेलनी पड़े लेकिन वो किसी के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगी।

तो वहीं सरकार बनाने के लिए मुलायम सिंह कभी भी भाजपा के साथ नहीं आ सकते हैं क्योंकि उन्हें भी पता है कि भाजपा से हाथ मिलाना यानी कि मौत को गले लगाना। जिसका बानगी वो पिछले उपचुनावों में कल्याण सिंह के साथ खड़े होकर देख चुके हैं।

इसलिए सत्ता हासिल करने के लिए साईकिल को पंजे से हाथ मिलाना ही पड़ेगा। चूंकि इस बार कांग्रेस की पकड़ मजबूत होगी इसलिए कांग्रेस कहेगी की ठीक है कि हम सपा के साथ मिलकर सरकार बनायेंगे लेकिन मुख्यमंत्री हमारा यानी कांग्रेसी होना चाहिए इसलिए इस बार का यूपी का मुख्यमंत्री कोई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ही होगा।

क्योंकि भले ही ऱाहुल गांधी ने यूपी चुनाव की कमान संभाली है लेकिन उनकी मंजिल सीएम की कुर्सी नहीं बल्कि दिल्ली का तख्तो-ताज है। जिसकी गद्दी पर वो साल 2014 में बड़ी ही शान से बैठना चाहते हैं। इसलिए यूपी का सीएम, यूपी का वो कांग्रेसी बांशिदा होगा जिसने अपनी आधी जिंदगी कांग्रेस और यूपी के नाम कर दी है।

इस श्रेणी में सबसे आगे कांग्रेस विधानमंडल के नेता प्रमोद तिवारी का नाम है जिनकी पहुँच अपने स्थान पर तो है ही साथ ही वो जमीनी स्तर से राज्य के लोगों और यहां की राजनीति के समझते हैं। इसलिए बुद्दिजीवियों की यह चर्चा कहती है कि सरकार किसी की भी बनें, सीएम तो कांग्रेसी ही होगा।

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