रालोद का यू-टर्न- जयंत नहीं होंगे सीएम कैंडिडेट

उत्तर प्रदेश की चुनावी जंग में बतौर उम्मीदवार मैदान में उतरे जयंत चौधरी को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने के कयास को चौधरी अजित सिंह ने खुद खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि रालोद छोटी पार्टी है और उनका कोई दावा नहीं है। जयंत की दावेदारी खारिज होने के बाद कांग्रेस को राहत मिली है। जयंत को विधानसभा चुनाव लड़ाने पर कांग्रेस आलाकमान नाराज माना जा रहा था।
चूंकि जयंत की उम्मीदवारी के बाद माना जा रहा था कि रालोद ने इस दांव के जरिये जयंत को प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री के दावेदार के तौर पर पेश किया है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में रालोद के इस दांव को लेकर संशय था। लेकिन चौधरी अजित सिंह ने मंगलवार को स्पष्ट कर दिया कि जयंत को मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट करने का कोई सवाल नहीं है।
उन्होंने यहां तक कह दिया कि रालोद छोटी पार्टी है। हालांकि जयंत के भविष्य को लेकर वह यह जरूर कह रहे है कि उन्हें उत्तर प्रदेश की राजनीति करनी है इसलिए उनका लखनऊ में रहना जरूरी है। लेकिन दूसरी ओर अचानक जयंत की दावेदारी खारिज करने के पीछे कांग्रेस का अजित सिंह पर दबाव भी माना जा रहा है। पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि जयंत को चुनाव लड़ाने को लेकर कांग्रेस ने अपना ऐतराज जता दिया था।
इसके बाद ही अजित सिंह ने जयंत को मुख्यमंत्री पद की दौड़ से खुद बाहर कर दिया। इस बीच रालोद ने असम के मुसलिम राजनीतिक दल यूनाइटेड डेमोक्रेटिक के सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल को अपने समर्थन में मैदान में उतार दिया है।
दूसरी ओर, बाटला हाउस मुठभेड़ के मसले पर सरकार ओर कांग्रेस की अलग अलग राय पर अजित सिंह ने कहा है कि इस मसले पर दोनों पक्षों को अपनी राय एक करनी चाहिए। बाटला हाउस मुठभेड़ के फर्जी होने या नहीं होने पर अजित सिंह ने अपना रुख स्पष्ट करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसी कोई जांच एजेंसी नहीं है, जिसके आधार पर वह साबित करें।
रालोद ने अगले सीएम के रुप में जयंत को प्रोजेक्ट कर दिया था। कांग्रेस रालोद के इस कदम से खफा हो गई थी। क्योंकि कांग्रेस इस तरह सीएम का नाम पहले घोषित करने के पक्ष में नहीं थी। क्योंकि चुनाव के बाद पता नहीं किससे क्या समीकरण बने। मथुरा से सांसद जयंत मैट से चुनाव लड़ रहे हैं।












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