'बुआ' से आशीर्वाद लेने के बजाये उलझे क्यों राहुल गांधी?
अजय मोहन
बुंदेलखंड यूपी के पिछड़े इलाकों में गिना जाता है, जहां हर साल किसानों द्वारा आत्महत्या के मामले दर्ज होते हैं। अपराध चरम पर है और यौन हिंसा के तो क्या कहने। सरकार की बात करें तो मायावती यहां विकास के दावे करती हैं, जबकि केंद्र सरकार कहती फिरती है कि उसने राज्य सरकार को जितना पैसा भेजा सब नेता डकार गये। हालांकि हाल ही में केंद्र ने चुनाव को देखते हुए कई योजनाओं की घोषणाएं कीं, लेकिन आज जब चुनावी माहौल गर्माया तो किसी के पास बहस करने के लिए इनमें से कोई मुद्दा नहीं है।
राहुल गांधी जो अभी तक उमा भारती का नाम तक नहीं लेते थे, अचानक क्यों उनके बारे में आग उगलने लगे। इसका उत्तर भी साफ है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने कल रात ही उन्हें चरखारी से प्रत्याशी घोषित कर दिया है। मुसीबत इस बात की नहीं है कि कांग्रेस के पास उमा भारती की टक्कर का कोई नेता नहीं है, यहां समस्या यह है कि उमा भारती लोध जाति से हैं। और इस चुनाव क्षेत्र में 70 हजार से ज्यादा लोध जाति के लोग ही रहते हैं।
उमा भारती के प्रत्याशी घोषित होने के कारण राहुल गांधी का चुनावी समीकरण रातों रात बिगड़ गया, जिसकी भड़ास उन्होंने सुबह होते ही निकाल दी। खैर उमा भी पीछे नहीं रहीं, वे भी सीधे सोनिया गांधी पर चढ़ गईं। इन सबके बीच न तो किसी ने किसानों के मुद्दों को छुआ और न ही इलाके के विकास के मुद्दे को। रैलियों में छिटपुट भाषणों में दावे कर एक बार फिर दोनों पक्षों ने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।












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