रामदेव पर स्याही फेंकने वाले को भाजपा से जोड़ना जल्दबाजी

पहले सवाल की बात करें तो यह उस तस्वीर से उपजा जो 2009 में दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के सदस्यता कार्यक्रम में खींची गई थी। उस तस्वीर में कामरान सिद्दीकी और पार्टी तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह एक दूसरे के बेहद करीब खड़े हैं। यही नहीं भाजपा कार्यकर्ताओं के मुताबिक उस दौरान कामरान ने मुस्लिम चेहरे के रूप में भाजपा का प्रचार भी किया था।
अब दूसरा सवाल यह उठता है कि बाबा रामदेव पर एक व्यक्ति कालिख फेंकता है और देखते ही देखते उसकी तस्वीर वो भी वह तस्वीर जिसमें वो राजनाथ सिंह के साथ खड़े हैं, एक टीवी चैनल को दे दी जाती है। यही नहीं टीवी चैनल भी ब्रेकिंग न्यूज के रूप में यह खबर चला देते हैं कि बाबा रामदेव पर स्याही फेंकने वाला भाजपा का कार्यकर्ता है। क्या चैनल ने यह जानने की कोशिश की फोटो खींचे जाने के तीन साल बाद भी क्या कामरान की सदस्यता जारी है। यह सब जानना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की लहर दौड़ चुकी है। भाजपा के वोट काटने के लिए ऐसे पैंतरे लाजमी हैं।
इस सवाल का उत्तर जानना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि भाजपा और बाबा रामदेव के बीच के मधुर संबंधों से हर कोई वाकिफ है और विरोधी पार्टियां इनके बीच फूट डालने के लिए कोई भी पैंतरा आजमा सकती हैं। ऐसे में कामरान को भाजपा से जोड़ना मीडिया की जल्दबाजी के अलावा कुछ नहीं।












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