अब कोर्ट न थोपे मकान मालिक पर किरायेदार की शर्तें

supreme court
नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि अदालत या किरायेदार मकान मालिक को यह नहीं कह सकते हैं कि उनके परिसर का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाए। शीर्ष न्यायालय ने मोहम्मद अयूब की उस अपील पर यह आदेश जारी किया, जिसके तहत निचली अदालतों के इससे संबंधित फैसलों को चुनौती दी गई थी।

गौरतलब है कि निचली अदालतों ने कहा था कि किराये पर लगाए गए परिसर से मकान मालिक अपना व्यवसाय नहीं चला सकता क्योंकि किरायेदार पिछले कई साल से वहां खुद का फोटोग्राफी व्यवसाय कर रहा है। न्यायालय ने कहा कि यह मकान मालिक पर निर्भर है कि वह कौन सा व्यवसाय करना चाहता है। अदालत उसे सलाह नहीं दे सकती। न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश ने कहा कि जिला अदालत को ऐसा नहीं कहना चाहिए था कि मकान मालिक कोई अन्य भवन खरीद कर कारोबार शुरू कर सकता है।

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि मुनाफा कमाने के लिए इमारत खरीदी गई थी। किराया नियंत्रण अदालत और जिला अदालत ने किरायेदार मुकेश चंद के पक्ष में फैसला सुनाया जबकि उत्तरांचल उच्च न्यायालय ने आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि मकान मालिक को कम से कम एक कमरा लौटाया जाए ताकि वह अपने बेटों के लिए व्यवसाय शुरू करने में सक्षम हो सके। न्यायालय ने कहा कि यह बात विदित है कि मकान मालिक की जरूरत को अत्यधिक तवज्जो दी जाए। अदालत मकान मालिक को कोई खास कारोबार करने का निर्देश नहीं दे सकती।

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