यूपी: चुनाव से पहले मुस्लिम संगठनों का समथर्न लेने की होड़

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में र्कइ सीटों पर मुसलमानों की निणार्यक भूमिका को देखते हुए प्रमुख राजनीतिक दल बड़े मुस्लिम संगठनों का समथर्न हासिल करने के प्रयास में जुट गए हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का आला नेतृत्व इन दिनों कई मुस्लिम संगठनों के लगातार संपर्क में हैं। ये दल उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की भूमिका को ध्यान में रखते हुए इस कवायद में जुटे हैं। पिछले दिनों सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने दिल्ली की जामा मस्जिद जाकर शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी से मुलाकात की।

इस दौरान मुलायम ने उनसे उत्तर प्रदेश में सपा का खुलकर समथर्न करने का आग्रह किया था। हालांकि बुखारी की ओर से अब तक सपा का स्पष्ट समथर्न करते हुए कोई बयान नहीं आया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और देश के कुछ अन्य हिस्सों में खासा असर रखने वाले संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद से कांग्रेस, सपा और बसपा के नेता लगातार संपर्क में है, हालांकि जमीयत का कहना है कि वह एक धामिर्क संगठन है इसलिए वह किसी भी पार्टी का खुलकर समथर्न नहीं कर सकता। जमीयत के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि यह बात सच है कि सभी प्रमुख दलों के लोग हमसे संपर्क कर रहे हैं।

जमीयत एक धामिर्क संगठन है और ऐसे में हम किसी का खुलकर का समथर्न नहीं करेंगे। मुस्लिम आवाम को धर्मनिरपेक्ष और मुसलमानों की भर्लाइ के लिए काम करने वालों को चुनना चाहिए। खबर है कि कांग्रेस और सपा के र्कइ नेता प्रमुख इस्लामी संस्था दारूल उलूम देवबंद के शीर्ष लोगों के भी संपर्क में हैं, लेकिन इस संस्था के लोग इस पर कुछ कहने से बच रहे हैं। अन्ना आंदोलन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर बैकफुट पर नजर आ रही कांग्रेस की एक बड़ी उम्मीद मुस्लिम मतदाता हैं। उत्तर प्रदेश में वह मुस्लिम मतदाताओं को खास तवज्जो दे रही है।

ओबीसी कोटे से 4.5 फीसदी आरक्षण अल्पसंख्यकों को दिए जाने को कांग्रेस अपने टंप कार्ड के रूप में इस्तेमाल कर रही है। राजनीतिक दल इस बार सूफी-बरेलवी धड़े को खास तवज्जो दे रहे हैं क्योंकि उन्हें यहां एक बड़ा वोट बैंक नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले में स्थित दरगाह किछौछा शरीफ से सक्रिय संगठन ऑल इंडिया उलेमा एवं मशायक बोर्ड (एआईयूएमबी) से भी र्कइ नेताओं ने संपर्क किया है, हालांकि बोर्ड की ओर से कुछ मांगों वाला एक ज्ञापन कांग्रेस, सपा और बसपा आलाकमान को सौंपा गया है।

एआईयूएमबी के प्रवक्ता सैयद बाबर अशरफ ने भाषा से कहा, तीनों पाटिर्यों के नेताओं ने हमसे संपर्क किया है, लेकिन हमने उनके सामने अपनी कुछ मांगें रखी हैं। इन मांगों पर जो पार्टी अपने संसदीय बोर्ड में प्रस्ताव पारित कर लिखित आश्वासन देगी, हम उसका समथर्न कर सकते हैं। उन्होंने कहा, हमारी पहली मांग है कि हर मुस्लिम बहुल इलाके में आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए स्कूल खोले जाएं। दूसरी प्रमुख मांग वक्फ की बदहाली को दूर करने की है। इसके अलावा हम सरकारी नौकरियों में मुसलमानों का वाजिब हक चाहते हैं। अशरफ ने कहा, हमने अपनी मांगों को लेकर ग्यापन तीनों दलों को दिया है। अभी किसी तरफ से जवाब नहीं आया है। जवाब आने पर हम आगे र्कोइ फैसला करेंगे।

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