रामदेव के नुस्खे को आजमाएगी सरकार

इस लिहाज से आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्यौपैथी जैसी इलाज की विधियों की अधिक से अधिक मदद ली जानी चाहिए। अपनी सिफारिशों में इसने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में काम कर रहे बाबा रामदेव के पातंजलि योगपीठ जैसे गैर सरकारी संगठनों के काम को बढ़ावा देने के लिए इनकी मदद करने को जरूरी बताया है। सरकार के लिए बाबा रामदेव जैसे योग और आयुर्वेद के गुरुओं की मदद लेना क्यों जरूरी है, यह पूछे जाने पर समिति के एक सदस्य कहते हैं, सरकार खुद ही दवा बनाने की विधि तय करे, दवा बनाए, सभी तक पहुंचाए और उन पर नजर भी रखे, यह मुमकिन नहीं।
इसके लिए गैर सरकारी संगठनों को आगे बढ़ाना ही होगा। वे यह भी कहते हैं कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह पर है, लेकिन ऐसे कुछ संगठनों और लोगों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। इसी तरह आयोग चाहता है कि एलोपैथी के डाक्टर अब योग और आयुर्वेद से नाक-भौं सिकोड़ना बंद कर खुद भी अपने मरीजों पर इन्हें आजमाएं। इसने साफ तौर पर सिफारिश की है कि एलोपैथी चिकित्सा के एमबीबीएस पाठ्यक्रम में योग और आयुर्वेद को भी शामिल किया जाए।
इसके मुताबिक आयुर्वेद, योग, यूनानी, होम्योपैथी और सिद्धा जैसी पद्धतियों को शामिल करते हुए अनिवार्य स्वास्थ्य पैकेज और लोक स्वास्थ्य के आदर्श माड्यूल तैयार किए जाएं और उन्हें इन पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाए। प्रतिष्ठित प्राइवेट अस्पतालों का हवाला देते हुए इसने कहा है कि एम्स और एम्स सरीखे अस्पतालों में भी आयुर्वेद और योग जैसी पद्धतियों के विशेषज्ञों को जरूर शामिल किया जाना चाहिए। इलाज के साथ ही गंभीर बीमारियों के मामले में उसके बाद के देख-भाल के लिए भी इसे जरूरी बताया है।












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