राज्यों के मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन 15 फरवरी को

साथ ही चर्चा की जाएगी कि राज्यों और केन्द्र की सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों के बीच और मजबूत समन्वय किस तरह स्थापित किया जाए। गृह मंत्रालय की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में यह चर्चा भी होगी कि कुछ पडोसी देशों की ओर से पेश आ रही समस्याओं से भारत किस तरह प्रभावित हुआ है और सीमा पार आतंकवाद, आतंकवादियों को पडोसी देशों से समर्थन, हथियारों की तस्करी, जाली भारतीय नोट, शरणार्थियों जैसे मुद्दों का देश पर क्या असर होगा।
सरकारी सूत्रों ने दावा किया कि देश के आंतरिक सुरक्षा हालात पिछले तीन साल में काफी सुधरे हैं क्योंकि केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय हुआ है। हालांकि नक्सलवाद अभी भी बडी चुनौती है, जिसकी वजह से 2011 में 600 जानें गयीं। राज्यों के मुख्यमंत्री और केन्द्रीय नेतृत्व माओवादियों से निपटने के लिए विकास के साथ साथ पुलिस कार्रवाई की दो सूत्री रणनीति की समीक्षा करेंगे और आगे की रणनीति भी तय करेंगे।












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