उत्तर प्रदेश चुनाव से टकरायी बजट सत्र की रेल

अब सवाल यह उठता है कि अगर बजट में कांग्रेस सरकार जनहित में कोई बड़ी घोषणा करती है, तो क्या वो वोटर को प्रभावित नहीं करेगी। सही मायने में यह सीधे तौर पर आचार संहिता का उल्लंघन है, लेकिन चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी यह बात मानने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि रेल बजट कब पेश करें यह सोचना केंद्र सरकार का काम है। इससे यह लगभग तय हो गया है कि बजट की यह रेल इस बार फरवरी में नहीं बल्कि मार्च में संसद भवन पहुंचेगी।
उधर यही सवाल तमाम नेताओं के आगे भी घूम रहा है, लेकिन कोई मुंह उठाकर बोलना नहीं चाहता। वो इसलिए क्योंकि बसपा को छोड़ कर सभी दल चाहते थे कि फरवरी में ही चुनाव हों, ताकि मायावती को ज्यादा समय नहीं मिले।
प्रमुख प्रतिक्रियाएं
- मायावती ने अभी तक चुनाव की तारीखों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
- भाजपा की ओर से राजनाथ सिंह ने खुलकर स्वागत किया और दावा किया कि वो भारी बहुमत से आयेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी, भले ही उसे विपक्ष के रूप में ही क्यों न बैठना पड़े।
- समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने भी फरवरी में चुनाव होने पर खुशी जताई। उन्होंने जनता से अपील की कि सपा को भारी मतों से जितायें। अखिलेश यादव ने कहा कि इस बार मायावती का भ्रष्टाचार ही चुनावी मुद्दा होगा।
- रालोद के अध्यक्ष अजित सिंह ने कहा कि जनता चाहती है कि जल्द से जल्द चुनाव हों और लोगों को मायावती से छुटकारा मिले। भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा है, वैसे तो सभी पार्टियों के खिलाफ चार्ज हैं, लेकिन यूपी में मायावती के कुशासन, जनता से दूर हो चुकी हैं, पत्रकारों से बात करने को तैयार नहीं हैं।
- कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि उनकी पार्टी चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है।












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