भारत ने रूस से कहा, परमाणु दायित्व के नियम संतुलित

भारत ने रूस से कहा कि परमाणु दायित्व के नियम संतुलित हैं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव की अभी मास्को में हुई शिखर बैठक के समय भारतीय अधिकारियों ने अलग से बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि भारत ने असैन्य परमाणु परियोजनाओं में दुर्घटनाओं पर उपकरण आपूर्तिकर्ता कंपनी के दायित्व पर पहली बार नियम बनाया है।
ये नियम विदेशी आपूर्तिकर्ता और परमाणु संयंत्र का परिचालन करने वाली फर्म दोनों की दृष्टि से संतुलित हैं। भारत की ओर से यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया जबकि रूस की ओर से मांग उठाई गयी कि पूरी कुडनकुलम (तमिलनाडु) परमाणु बिजली परियोजना को दायित्व की परिधि से बाहर रखा जाए।
पर रूसी राजदूत एलेक्जंडर कदाकिन ने साथ साथ यह उम्मीद जताई कि इन नियमों के कारण दोनों देशों के परमाणु सहयोग पर असर नहीं पड़ेगा। रूस चाहता है कि कुडनकुलम परिसर में प्रस्तावित तीसरे और चौथे रिएक्टरों पर केवल वही शर्ते हों जो पहले और दूसरे पर लागू हैं। पहले दो रिएक्टरों के संबंध में रूसी आपूर्तिकताओं पर ऐसा कोई दायित्व लागू नहीं है। अगले दो रिएक्टरों का अनुबंध अभी नहीं हुआ है। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि तब की तब देखा जाएगा।












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