सभी दल नाखुश, अधर में लटक सकता है लोकपाल बिल!

सर्वदलीय बैठक से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई थी कि संसद के इसी सत्र में लोकपाल बिल पारित हो जायेगा, जिसके लिए उन्हें बैठक में आम राय बनने की उम्मीद थी, लेकिन कई मुद्दे ऐसे हैं, जिन पर आम राय नहीं बन सकी। सबसे पहली बात है ग्रुप सी और डी के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लेने की, जिस पर प्रमुख विपक्षी दल भाजपा राजी है, लेकिन सरकार नहीं। सरकार की राय है कि ग्रुप सी और डी के डी के लिए एक अलग से भ्रष्टाचार निरोधी कानून बनाने की जरूरत है।
दूसरी बात प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लेने की, जिस पर सरकार अपना रुख स्पष्ट नहीं कर पायी। अगली बात सीबीआई और सीवीसी को लोकपाल के दायरे में लेने की है, जिस पर सरकार और भाजपा दोनों की दिशाएं अलग-अलग हैं। तीन घंटे तक चली इस मीटिंग में भाजपा व अन्य दलों ने सीबीआई की जांच इकाई को लोकपाल के दायरे में रखने की मांग की, जिस पर सरकार राजी नहीं हुई।
शिरोमणि अकाली दल ने सीबीआई को लोकपाल से अलग रखने की मांग की है, जबकि कुछ दलों ने अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए इस बिल में कुछ नहीं होने का विरोध किया।
वैसे लोकपाल बिल को लोकसभा में 20 दिसंबर को लाने की बात जरूर हुई है। जाहिर है सर्वदलीय बैठक में सहमति नहीं बनने के बाद अगर यह बिल सदन में आया तो भारी हंगामा होगा। ऐसे में बिल का पास होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। वहीं अन्ना हजारे भी साफ कह चुके हैं कि अगर बिल पास नहीं हुआ तो वो 26 दिसंबर से अनशन पर फिर से बैठ जायेंगे।












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