मानवाधिकारों के प्रति भारत से ज्‍यादा सजग अमेरिका

US respects Human Rights more than India do
लखनऊ। राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के मौके पर अखिल भारतीय अधिकार संगठन ने लखनऊ के हजरत गंज में गांधी प्रतिमा स्‍थल पर एक नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया। पूरा नाटक इस बात को रखने में सफल रहा कि भारत में पन्नो पर तो अधिकार इतने दे दिये गए है कि दुनिया के बड़े-बड़े देश भी शर्मिंदा हो जायें। पर सच ये है कि अमेरिका जैसे देश जहां का संविधान सबसे छोटा है, वह मानवाधिकार के प्रति सवेंदंशिलता ज्यादा दिखाई देता है।

ऐसे में भारत जैसे देश में रोज नए कानून बना कर जनता के सामने रख देना मानवाधिकार नही हो सकता और इस से न तो विश्व को और न ही देश कि जनता को काफी समय तक मुगालते में रखा जा सकता है। यह बात भी सोचने की है कि भारत में साक्षरो कि संख्या बढ़ी है न कि पढ़े लिखे लोगो की, जिसके कारण देश में हर तरह का गलत कार्य जिन्दा है।

सूचना का अधिकार अधिनियम में अगर सूचना नही मिल रही है तो देश की जनता को यह मालूम ही नही है, कि वोह उपभोक्ता फोरम जा सकते है और दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय ने इस पर एक निर्णय देकर जुरमाना तक लगाया यानि अगर देश कि जनता जागरूक हो जाये तो मानवाधिकार को सही अर्थो में जाना जा सकता है।

नाटक में संगठन के अध्‍यक्ष डॉ आलोक चान्टिया, शशांक उपाध्याय, प्रन्शुल गौतम, श्वेता सिंह, दीपा नेगी, डिम्पल यादव, शिवम्, पवन नाग, पवन गौर पुष्पेन्द्र, अरविन्द शर्मा, संदीप कुमार सिंह सहित डॉ प्रीती मिश्रा डॉ महिमा देवी, डॉ अंशु केडिया, अंकित गोएल, उमेश शुक्ल, विश्वनाथ प्रसाद, अतुल कुमार सिंह, अभिषेक कुमार गुप्ता, समत सोनिया श्रीवास्तव, वंदना त्रिपाठी आदि लोग उपस्थित थे।

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