पोस्टमैन के समान होगा सरकारी लोकपाल: शांति भूषण

शांति भूषण ने कहा, "हमें स्थाई समिति से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन रिपोर्ट पढ़ कर मैं अचंभित रह गया। उन्होंने लोकपाल से जांच के अधिकार तक छीन लिये। सरकार का कहना है कि जांच का अधिकार लोकपाल के पास नहीं होगा, वो सिर्फ शिकायतों का चयन करेगा। लोकपाल यह देखेगा कि लोकपाल सिर्फ यही देखेगा कि शिकायत जायज है या नाजायज। शिकायत बेबुनियाद होने पर उन्हें कचरे के डिब्बे में डाल देगा और अगर जांच जायज है, तभी वो सीबीआई या अन्य जांच एजेंसी को सौंपेगा।
शांतिभूषण ने कहा कि सरकार के बिल के मुताबिक लोकायुक्त सिर्फ जांच को एंटीकरप्शन पुलिस को भेजेगा न कि खुद जांच करेगा। यानी सरकारी लोपाल आने पर वही होगा जो आज हो रहा है। असली मामला तो जांच का ही है। लोकपाल जैसे इंस्टीट्यूशन बनाने की क्या जरूरत। उन्होंने कहा, "मैं पूछा चाहता हूं अभिषेक मनु सिंघवी से जो इतने काबिल वकील हैं... वकील दो प्रकार के होते हैं काले को सफेद करते हैं और दूसरे सफेद को सफेद और काले को काला करते हैं। पता नहीं वो कौन से वकील हैं, लेकिन उनसे पूछा चाहूंगा कि लोकपाल को कौन से अधिकार देना चाहते हैं।"
शांतिभूषण ने आगे कहा कि अभिषेक मनु सिंघवी ने जनता को खुलेआम बेवकूफ बनाया है। लोकपाल का जो असली अधिकार है, जिसके लिए लड़ाई चल रही है वो सब बेकार है। सच पूछिए तो सरकार का लोकपाल जनता और जांच एजेंसियों के बीच एक पोस्टमैन से ज्यादा कुछ नहीं होगा।












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