घरेलू नौकरानियों को मिलेगा यौन शोषण से संरक्षण

संसद की स्थायी समिति ने दि प्रोटेक्शन आफ वुमेन अगेंस्ट सेक्सुअल हेरेसमेंट एट वर्कप्लेस बिल 2010 में इस तरह के कई महत्वपूर्ण संशोधन के सुझाव दिए हैं। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1997 में विशाखा आदि बनाम राजस्थान सरकार के मामले में फैसला देते समय कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा एवं उन्हें यौन शोषण से बचाने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों को कई कदम उठाने के निर्देश दिए थे। साथ केंद्र से इस बारे में उचित कानून बनाने को भी कहा था।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस सभी राज्यों ने लागू करने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद कार्यस्थल पर यौन शोषण के मामलों में बहुत प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। इस मुद्दे पर बिल लाने में भी 13 साल लग गए। 2010 में दि प्रोटेक्शन आफ वुमेन अगेंस्ट सेक्सुअल हैरेसमेंट एट वर्कप्लेस बिल संसद में पेश हुआ। राज्यसभा के सभापति ने बिल को अध्ययन व सुझाव के लिए मानव संसाधन मंत्रालय की स्थायी समिति को सौंप दिया था। समिति ने अपनी सिफारिशों सहित इसी हफ्ते अपनी रिपोर्ट राज्यसभा के सभापति को सौंपी है। घरेलू नौकरानियों को शामिल किए जाने से इसका दायरा और व्यापक हो जाएगा।
इस कानून के तहत ना सिर्फ कामकाजी महिलाओं बल्कि कार्यक्षेत्र में प्रवेश करने वाली ग्राहक,प्रशिक्षु,दैनिक वेतन कर्मी महिलाओं को भी इसमें शामिल किया गया है। छात्राओं, कॉलेज एवं विश्वविद्यालय की शोधकर्मियों एवं अस्पताल में महिला रोगियों को भी इसमें शामिल किया है। इसके साथ असंगठित क्षेत्र के कार्यस्थल को भी शामिल करने का प्रस्ताव विधेयक में किया गया था, जिसे अब सरकार ने मान लिया है।












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