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ग्रह की खोज में मिला हजारों टन हीरा

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    दिल्ली (ब्यूरो) । हमारी आकाशगंगा (मिल्की वे) में तमाम ऐसे ग्रह हैं जिन पर अरबों टन हीरा पड़ा हुआ है। ग्रहों पर कार्बन की स्थिति पर शोध कर रहे अमेरिका के ओहियो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने यह खुलासा किया है। वैज्ञानिक वेंडी पेनरो कहती हैं कि हम जानना चाहते थे दूसरे ग्रहों पर कार्बन का क्या हाल है। उन्होंने कहा कि हमने वहां से आनेवाली किरणों का विश्लेषण करने के बाद पाया कि तमाम बड़े ग्रहों पर कार्बन का रुप पूरी तरह हीरे में बदल चुका है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी से 15 गुना बड़े कई ग्रहों का आधा हिस्सा सिर्फ हीरे से बना है। यह मात्रा अरबों टन से भी ज्यादा है। यह अलग बात है कि यहां तक पहुंचना कभी मुमकिन नहीं हो पाएगा, क्योंकि इन ग्रहों से हमारी धरती तक रोशनी को आने में ही वर्षो लग जाते हैं।

    हालांकि हीरे से बने इन ग्रहों पर जीवन की कोई संभावना नहीं है। अमेरिका की ओहायो यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक वेंडी पनेरो का कहना है हीरे ऊष्मा के अच्छे संचालक होते हैं। इसलिए इन ग्रहों के केंद्र से गर्मी बहुत जल्द बाहर निकल जाती होगी ये तुरंत ठंडे हो जाते होंगे। चूंकि इनके केंद्र में जरूरी गर्मी नहीं होती है इसलिए इनमें धरती की तरह जरूरी जियोथर्मल एनर्जी भी नहीं मौजूद होगी। जियोथर्मल एनर्जी की ही बदौलत हमारी धरती के आसपास वायुमंडल है, मैग्नेटिक फील्ड है।

    मिली दूसरी धरती

    उधर वैज्ञानिकों का एक ऐसा ग्रह मिला है जो सचमुच धरती जैसा है। यों कहे तो वह धरती से भी बेहतर है। जीवन पनपने के लिहाज से वहां आदर्श वातावरण है। तापमान 22 डिग्री के आस-पास रहता है। यानी हमेशा वंसत जैसा मौसम रहता होगा। कोई तीन साल पहले अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने नए ग्रहों की तलाश में केपलर नाम का टेलीस्कोप पृथ्वी से बाहर अनजान दुनिया की खोज में भेजा था। यहां पानी होने की पूरी संभावना दिख रही है यानी उस ग्रह में वह सारे गुण हैं, जो पृथ्वी में हैं और जिसके आधार पर जीवन की कल्पना की जा सकती है।

    केपलर को सम्मान देते हुए ग्रह का नाम रखा गया है, केपलर-22 नया ग्रह अपने प्रमुख सितारे की उसी तरह परिक्रमा कर रहा है, जैसा पृथ्वी सूर्य की करता है। उसका तारा सूर्य जितना ही बड़ा लग रहा है। केपलर-22बी को इसकी परिक्रमा करने में पृथ्वी से करीब 10 महीने कम लगभग 290 दिन का वक्त लगा है. बस इस ग्रह का आकार थोड़ा बड़ा है। यह पृथ्वी से करीब 2.4 गुना बड़ा है। फिर भी हमारे सौरमंडल के बाहर मिले दूसरे ग्रहों से इसका आकार छोटा है।

    यह ग्रह हमारे सौरमंडल से कोई 600 प्रकाश वर्ष दूर है. एक प्रकाश वर्ष की दूरी तय करने में अनुमानित 10,000 अरब साल का वक्त लग जाता है. यानी मौजूदा वक्त की सबसे तेज उड़ान भरने वाला अंतरिक्ष यान केपलर-बी22 तक पहुंचने में कोई सवा दो करोड़ साल लगाएगा। मौजूदा वक्त में भले ही यह नामुमकिन लग रहा हो लेकिन विज्ञान अद्भुत आविष्कारों का गवाह रहा है और कब कौन सा आविष्कार कौन से दरवाजे खोल दे, कोई नहीं कह सकता। नासा के वैज्ञानिकों ने कहा कि वहां भविष्य में मनुष्य रह सकता है। गौरतलब है स्टीफन हाकिंग्स ने आगाह किया है कि धरती पर जीवन एक हजार साल में खत्म हो जाएगा।

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    English summary
    Some planets in our galaxy could be made of diamonds, a new study has suggested. These potential giant terrestrial planets, whose insides could be up to 50 per cent diamond, are dubbed "carbon super-Earths" by scientists.

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