संसद चले तो पूरा माहौल सुधर जायेगा: प्रणव मुखर्जी

लेकिन 22 नवंबर को शुरू हुए इस सत्र में आज सुचारू रूप से कामकाज हुआ और लोकसभा ने अनुदान की अनुपूरक मांगों को ध्वनिमत से मंजूर किया। 2011-12 के दौरान सरकारी व्यय 56800 करोड रूपये और बढाने के उद्देश्य से ये मांगें रखी गयी थीं। मुखर्जी ने कहा, यदि संस्थाएं मजबूत रहती हैं, यदि संसद चलती है, यदि सदन (विधेयकों पर) चर्चा करता है और पारित करता है तो हालात बेहतर हो सकते हैं, आप देखेंगे कि माहौल बदल गया है। उन्होंने कहा कि मंदी के बावजूद बचत दर और निवेश दर लगभग 33 से 35 प्रतिशत पर मजबूत बनी हुई हैं हालांकि मुद्रास्फीति और राजकोषीय घाटे को लेकर चिन्ताएं जरूर हैं।
मुखर्जी ने कहा कि भारत कई अन्य देशों के मुकाबले अच्छी विकास दर हासिल कर रहा है हालांकि यह नौ प्रतिशत के उंचे स्तर से नीचे आयी है। वित्त मंत्री ने कहा कि दूसरी तिमाही में तुर्की को छोड दुनिया के किसी अन्य उस देश की विकास दर उंची नहीं रही है, जो आकार के मामले में लगभग एक जैसे हैं। भारत ने दूसरी तिमाही में 6.9 प्रतिशत की विकास दर हासिल की। चालू वित्त वर्ष में इसकी विकास दर गिरकर 7.5 प्रतिशत रहने की आशंका है। 2010-11 में यह 8.5 प्रतिशत थी। महंगाई के बारे में मुखर्जी ने कहा कि खाद्य मुद्रास्फीति फरवरी 2010 में 22 प्रतिशत थी जो नवंबर 2011 में गिरकर आठ प्रतिशत रह गयी लेकिन इसे पांच से छह प्रतिशत पर लाने की जरूरत है।












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