आईएम का एक और आतंकी गिरफ्तार

Indian Mujahideen (IM)
दिल्ली (ब्यूरो)। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इंडियन मुजाहिदीन के आतंकवादी फारूख को पूर्णिया (बिहार) से गिरफ्तार किया है। फारूख को बिहार की कोर्ट में पेश कर ट्रांजिस्ट रिमांड पर दिल्ली लाया जा रहा है। आज शाम तक पुलिस उसे दिल्ली लेकर आएगी। पुलिस अब तक आईएम के सात आतंकवादियों को गिरफ्तार कर चुकी है। स्पेशल सेल के अधिकारियों के अनुसार चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुए धमाके में फारूख की तलाश थी। फारूख, यासिन भटकल, कतिल और गौहर के साथ चिन्नास्वामी स्टेडियम गया था। यहां पर इन लोगों ने दस बम प्लांट किए थे।

गिरफ्तार आईएम सदस्यों से सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि गिरपफ्तार सदस्यों को खतरनाक ट्रेनिंग दिलवाई जानी थी। गायूर अहमद जामाली, मो. कातिल सिद्दीकी और मो. इरशाद खान को ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेजा जाना था। दिल्ली पुलिस अगर एक महीने तक इस मॉड्यूल का पर्दाफाश नहीं करती ये लोग पाक जा चुके होते। पाक जाने के लिए इनका बिहार और चेन्नई से पासपोर्ट तैयार करवाए जा रहे थे। पासपोर्ट पर फोटो तो इनकी होती मगर पता और नाम फर्जी होते। पुलिस के अनुसार नेपाल के रास्ते इन्हें पाकिस्तान भेजा जाना था।

इनमें से आठ खराब हो गए थे जबकि दो बम फटे थे। पुलिस मान रही है कि फारूख की गिरफ्तारी से कई अहम बातें सामने आ सकती है। पुलिस को पता चला है कि इंडियन मुजाहिद्दीन (आईएम) के भारत मॉड्यूल के सरगना अहमद सिद्दी बच्चा उर्फ शाहरुख उर्फ यासिन भटकल कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले दिल्ली में करीब-करीब मुंबई जैसा हमलाकर बड़ी तबाही करना चाहता था। इसके लिए उसने पहाड़गंज के होटल वाले इलाके को चुना। जामा मसजिद फायरिंग से कुछ समय पहले भटकल ने मो. कातिल सिद्दीकी और पाक नागरिक मो. आदिल को पहाड़गंज में फायरिंग करने भेजा था। यहां मो. कातिल बाइक चला रहा था जबकि आदिल पिस्टल में कारतूस लोड कर रहा था। तभी आदिल से चली गोली मो. कातिल के कमर से नीचे लगी थी। इसके बाद दोनों वहां से भाग आए। फायरिंग के बारे में काफी लोगों को पता लगा था।

वरिष्ठ पुलिस सूत्रों के अनुसार गोली रगड़ खाते हुए निकल गई थी। इसका दिल्ली में ही इलाज हुआ था। मगर घटना की जानकारी न तो खुफिया विभाग को हुई और न ही पुलिस ने मामला दर्जकर तफ्तीश करने की जहमत उठाई। पहाड़गंज में ये लोग होटल में ठहरे विदेशियों को अपना निशाना बनाते। इसके लिए इन्होंने कई महीने रेकी भी की थी। इन्होंने यहां यह भी देखा कि किस समय विदेशी ज्यादा ठहरते हैं और किस समय होटल से बाहर आते हैं। पहाड़गंज में भी उसी बाइक का इस्तेमाल हुआ था जिसका जामा मसजिद फायरिंग के दौरान किया गया था। इस मिशन के फेल होने के बाद जामा मसजिद को चुना गया था। जामा मसजिद जाने के दौरान भटकल ने इन्हें इस तरह की गलती नहीं करने की हिदायत दी।

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