आगरा का राजनैतिक इतिहास

आगरा शहर को सिकंदर लोदी ने सन् 1506 ई. में बसाया था। आगरा 1526 से 1658 तक मुग़ल साम्राज्य की राजधानी रहा। आज भी आगरा मुग़लकालीन इमारतों जैसे - ताज महल, लाल किला, फ़तेहपुर सीकरी आदि की वजह से एक विख्यात पर्यटन-स्थल है। ये तीनों इमारतें यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की लिस्ट में शामिल हैं।
अपने मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालय के लिए जाने जाना वाले आगरा शहर पर उसके पड़ोसी दिल्ली का असर ज्यादा दिखता है। सैलानियों की आवाजाही के बावजूद इस शहर में विकास ना के बराबर है। प्रमुख जंक्शन होने के बावजूद यहां की सड़के बदहाली की शिकार है। जातियों के नाम पर बंटा यह शहर सपा औऱ बसपा के बीच में फंसा हुआ है। अगर सत्ताधारी पार्टी यहां कुछ करती है तो स्थानीय नेता उसे खाक में मिला देते हैं। जिसका नतीजा है यहां का क्राइम ग्राफ काफी ऊपर होना।
पुलिस डायरी के मुताबिक 2010 में आगरा जिले में लूट के 26 मामले, हत्या के 52 मामले, बलात्कार के 7 मामले, चोरी के 702 मामले, महिला उत्पीड़न के 166 मामले और दहेज हत्या के 31 मामले दर्ज हैं। वहीं जनवरी 2011 से जून 2011 तक यहां पर लूट के 75 मामले, हत्या के 82 मामले, बलात्कार के 30 मामले, चोरी के 1449 मामले, डकैती के 5 मामले, महिला उत्पीड़न के 146 मामले, दहेज हत्या के 36 मामले दर्ज हैं।
आगरा कैंट, आगरा इस्ट, आगरा नार्थ, आगरा देहात, आगरा साउथ, आगरा वेस्ट, बह, दयालबाग, एतमादपुर, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी औऱ खेरागढ़ इस के प्रुमुख निर्वाचन क्षेत्र हैं। जाति के नाम पर वोटिंग होने के कारण यह शहर आज भी विकास का इंतजार कर रहा है। अगर इस क्षेत्र की पुस्तैनी कलाओं और उद्योगो को सही दिशा मिले तो आगरा का नाम केवल विश्व के मानचित्र पर ताजमहल के लिए नहीं बल्कि और भी खूबसूरत चीजों के लिए जाना जायेगा।












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