दिल्ली चिडि़याघर से परिंदों की बेरुखी

उनके अनुसार मौसम में आये बदलाव से लेकर सर्दी के आगमन में देरी तक ऐसे कारण है जिन्होंने पक्षियों के इस प्रवासी अभ्यास को बदला है। रियाज कहते हैं कि पक्षियों के रवैये में आया यह बदलाव हालिया नहीं है। वह बताते हैं कि 1990 के दशक में 5000 पक्षी अपना ठिकाना यहां आकर ढंढते थे, लेकिन हाल के वर्षों में सिर्फ 1000 पक्षी ही यहां की ओर रूख करते हैं। हालांकि साइबेरिया और दक्षिणपूर्व एशिया से करीब 100 पक्षी यहां पहुंच चुके हैं।
यह वे पंछी हैं जो अपने मूल निवास से दूर कहीं जाकर घोंसला बनाते हैं। इनमें डैबचिक, टील जैसी प्रजातियां प्रमुख हैं। चिडि़या घर के अधिकारियों ने भी अब राशन में 60 किलो अतिरिक्त मछली का प्रबंध कर दिया है ताकि इन प्रवासी पक्षियों को भी खाना नसीब हो सके। रियाज़ का कहना है कि यह भी अभी पर्याप्त नहीं है क्योंकि हर पक्षी की खुराक करीब 300 गा्रम मछली की है। यदि और पंछी यहां आकर आसरा ढूंढते हैं तो राशन में फिर इजाफा करना होगा।












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