'सरकार लटका रही है अफजल गुरु का मामला'

इसके जवाब में गृह मंत्रालय ने लिखा है कि अफजल गुरु ने खुद नहीं बल्कि उसकी पत्नी तबस्सुम अफजल दया याचिका लगाई है जो मंत्रालय को 3 अक्टूबर 2006 को प्राप्त हुई थी। पांच साल तक यह याचिका गृह मंत्रालय के पास पड़ी रही। इसके पास दया याचिका महामहीम राष्ट्रपति के पास भेज दी गई जो राष्ट्रपति भवन को 4 अगस्त 2011 को प्राप्त हुई है। पवन पारीक ने यह भी पूछा था कि दया याचिका पर कितने समय में राष्ट्रपति द्वारा फैसला दिया जाता है।
इसका जवाब दिया गया है कि दया याचिकाओं के निस्तारण की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है। इसका अर्थ है कि मौत की सजा पाए अपराधियों की दया याचिका वर्षों तक वहां पड़ रह सकती है जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अपमान नहीं तो क्या है।
20 दया याचिकाएं हैं पेंडिंग
वर्तमान में राष्ट्रपति व गृह मंत्रालय के पास मौत की सजा पाए 20 लोगों की दया याचिकाएं पेंडिंग हैं। इनमें से 16 राष्ट्रपति के पास जबकि 4 गृह मंत्रालय के पास पड़ी हैं। जो दया याचिकाएं लंबित हैं वे इस प्रकार से है। गुरमीत सिंह, सुरेश, रामजी, साईबन्ना कर्नाटक, बहादुर सिंह, करण सिंह, जफरअली उत्तरप्रदेश, धर्मपाल, सोनिया तथा संजीव हरियाणा, शेख मीरन, सेलवम, राधाकृष्ण तमिलनाडु, ओमप्रकाश उत्तराखंड, साईमन,ज्ञानप्रकाश,बंदू बाबूराव तिड़के, मदैहा व प्रवीण कुमार कर्नाटक, सतीश, सुशील, मुरमू झारखंड, मो.अफजल गुरु दिल्ली, ललिया डूम, शिवलाल राजस्थान राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका लगाए हुए हैं जबकि प्रजीत कुमार सिंह बिहार, सुंदर सिंह उत्तराखंड, बंटू उत्तरप्रदेश व अतबीर दिल्ली गृहमंत्रालय के पास माफी की गुहार लगाए हुए हैं।












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