इंदिरा गोस्वामी के निधन पर उल्फा ने व्यक्त किया शोक

गोस्वामी के प्रति सम्मान दर्शाने के लिए आज उल्फा की हर इकाई में शोक सभा आयोजित की जाएगी और कल गोस्वामी के जीवन और साहित्य के लिए किए गए उनके योगदान पर चर्चाएं की जाएंगी। गोस्वामी ने उल्फा और सरकार के बीच शांति दूत की भूमिका निभाई थी जिसके बाद प्रतिबंधित उल्फा संगठन ने जन सलाहकार समिति (पीसीजी) का गठन किया था। समिति ने केंद्र सरकार के साथ तीन चरणों की बातचीत की जिसमें एक में प्रधानमंत्राी मनमोहन सिंह भी शामिल हुए थे।
मानव की गरिमा और आत्मसम्मान को गोस्वामी ने बनाया था अपनी कलम का जरिया
असम में तीन दशक लंबे विद्रोह की छाया के बीच साहित्यकार इंदिरा आर. गोस्वामी ने न सिर्फ हिंसा के मुद्दे को उठाने के लिए अपनी कलम को उठाया बल्कि प्रतिबंधित उल्फा को बातचीत की मेज पर लाने के पहल भी की। ममोनी रेसोम गोस्वामी के उपनाम से लिखना पसंद करने वाली इंदिरा गोस्वामी ने अनेक उपन्यास, लघु कथा संग्रह और अध्ययनशील लेख लिखे जिनमें विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोगों का दर्द झलकता है जिनके दुखों ने उन्हें उस आधारभूत गरिमा और सम्मान से वंचित कर दिया है जिसके वे हकदार हैं।
उन्होंने प्रतिबंधित उल्फा को आगे की वार्ता के लिए तैयार करने और 2003 में पीपुलस कंसल्टेटिव ग्रुप (पीसीजी) की स्थापना तथा उन्हें सलाहकार के रूप में नियुक्त करने की पहल भी की। गोस्वामी के प्रयासों के भले ही तत्काल नतीजे नहीं निकले हों लेकिन इन्होंने उल्फा नेताओं और सरकार के बीच जारी वार्ता के लिए निश्चित तौर पर मार्ग प्रशस्त किया।












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