बाबू सिंह कुशवाहा को सीबीआई का सहारा

तो ऐसे में श्री कुशवाहा के सामने गवाह बनने के सिवाय कोई और रास्ता नहीं बचता है। सूत्र भी इस ओर इशारा करते हैं कि प्रदेश में एनआरएचएम के करोड़ों के घोटाले और चिकित्साधिकारियों की हत्या के मामले में श्री कुशवाहा प्रमुख कड़ी हैं और देर सबेर उन्हें सीबीआर्ई का साथ देना ही होगा। श्री कुशवाहा अब न तो मंत्री है और न ही मायावती के करीबी ही हैं तो ऐसे में अब उनको किसी भी प्रकार का सरकारी संरक्षण मिलता नहीं दिख रहा है। हालिया घटनाक्रम में श्री कुशवाहा का यह बयान कि उनकी हत्या हो सकती है, यह साबित कर रहा है कि उन्हें डर सता रहा है कि अगर सीबीआई ने शिंकजा कसा तो बचने के लिए उनके पास कोई रास्ता नहीं है।
श्री कुशवाहा ने लोक निर्माण मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी सहित सचिव शशांक शेखर सिंह तथा गृह विभाग के प्रमुख सचिव कुंवर फतेह बहादुर से जान का खतरा बताया था। उन्होंने इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री मायावती को पत्र भेजकर इन तीनों पर जान से मारने का आरोप लगाया है। सरकार ने बाबू सिंह के आरोपों को निराधार बताकर पल्ला झाड़ लिया लेकिन इस मामले की तह तक जायें तो श्री कुशवाहा का डर यूंही नहीं है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि श्री कुशवाहा के पास इन घोटालों से जुड़े कई राज दफन हैं कारण एक तो वह परिवार कल्याण विभाग के मंत्री रहे हैं वहीं दूसरी ओर वह मायावती के करीबी थे।
अब मायावती उनसे किनारा कर चुकी हैं, राजनीतिक हैसियत खत्म हो चुकी है। सीबीआई को सीएमओ हत्या की जांच के साथ प्रदेश के एनआरएचएम घोटाले का भी जिम्मा सौंप दिया गया है। ऐसे समय में श्री कुशवाहा ने खुद की हत्या कराने की आशंका जाहिर कर शक गहरा दिया है कि कहीं न कहीं उनके सीने में कोई राज दफन जरूर है। सवाल यह भी है कि अब जबकि श्री कुशवाहा मंत्रीमंडल से बाहर है तो बिना वजह कोई उनकी हत्या क्यों करायेगा। कहीं न कहीं जरूर ऐसा बात है जो सामने आना बाकी है। बहरहाल मौजूदा हालत तो यहीं कर रहे हैं कि सीबीआई का गवाह बनने के सिवाय उनके पास कोई चारा भी नहीं है।












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