यूपी ने रचा इतिहास मात्र 16 मिनट में निपटा शीतकालीन सत्र

एक दिन का शीताकालीन सत्र पहली बार चला और यह 16 मिनट में ही खत्म भी हो गया। ग्यारह बजे सत्र शुरू हुआ लेकिन 11 बजे से 12 बजकर 32 मिनट के सदन में एक घण्टा सोलह मिनट कार्यवाही स्थगित रही। विपक्ष के शोरशराबे के बीच संसदीय कार्यमंत्री लालजी वर्मा ने लेखानुदान पेश किया। इसके पारित होते ही मुख्यमंत्री मायावती ने राजनीतिक दांव चलते हुए प्रदेश के चार भागों में विभाजित करने का एक लाइन का प्रस्ताव पेश किया।
इस प्रस्ताव के ध्वनिमत से पारित होते ही विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी। इससे पहले सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पेश करने को लेकर किये गये हंगामे के कारण पांच मिनट के अन्दर ही अध्यक्ष ने 12 बजकर 20 मिनट तक सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी थी। इसके बाद सदन मात्र 10 मिनट चला और 15वीं विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी।
इस तरीके से चली सदन की कार्यवाही को विपक्ष ने अलोकतांत्रिक बताया तो मुख्यमंत्री मायावती ने इसके लिए विपक्ष को ही जिम्मेदार ठहराया। तीस वर्षों तक विधानसभा के मार्शल रहे महेन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि इतना संक्षित सत्र कभी नहीं चला। त्रिपाठी ने दावा किया कि इससे पहले 1998 में दो दिन का सत्र कांग्रेस नेता जगदम्बिका पाल के मुख्यमंत्री बनने के समय चला था और वह भी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर। उच्च न्यायालय के निर्देश पर सदन में मतदान हुआ था तथा मतों को गिनती के लिए दो दिन तक सदन चला था।
उन्होंने कहा कि विधानसभा ने यह नया इतिहास रचा है जिसमें पूरे सत्र की कार्यवाही मात्र 16 मिनट में निपट गयी। उन्होंने कहा कि परम्परा रही है कि सत्र के पहले दिन सदन के नेता व मु यमंत्री कार्यवाही शुरु होते समय मौजूद रहते थे लेकिन मुख्यमंत्री प्रश्न प्रहर के बाद आयीं।












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