विधानसभा अध्यक्ष का रवैया असंवैधानिक: बीजेपी

श्री सिंह ने कहा कि अध्यक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव को न तो नियम विरुद्ध कहा और न ही उसे स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि जो कुछ मायावती सरकार ने किया उससे बढ़कर यह है कि अध्यक्ष व्यवहार ने संसदीय परम्पराओं का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने भी संसदीय परम्पराओं का उल्लंघन किया है। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष की मिलीभगत से विधानसभा की कार्यवाही मात्र 16 मिनट में निपटा दी गयी। भाजपा ने कहा कि यदि सरकार का बहुमत था तो मुख्यमंत्री अविश्वास प्रस्ताव और राज्य विभाजन के प्रस्ताव पर चर्चा से क्यों भागीं।
यदि उनका वास्तव में बहुमत था तो उन्हें विपक्ष को बेनकाब करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि मायावती ने देश और सदन दोनों को भ्रमित किया है। राज्य विभाजन का प्रस्ताव किसी भी विधायक के पास नहीं था। एक लाइन का हाथ से लिखा प्रस्ताव उन्होंने पढ़ दिया। उन्होंने कहा कि 15वीं विधानसभा में मुख्यमंत्री मुश्किल से नौ घण्टे सदन में बैठीं। श्री सिंह के नेतृत्व में भाजपा के एक प्रतिनिधिमण्डल ने राज्यपाल बी.एल. जोशी से मुलाकात कर राज्य के विभाजन के प्रस्ताव को स्वीकृत नहीं करने और विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर उसमें चर्चा कराने का आग्रह किया।












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