मिट्टी में मिलता रुपया और आसमान छूती महंगाई

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डॉलर की बढ़ती मांग और मजबूती के कारण बाकी कई देशों की करेंसी कमजोर हुई है। जिसका असर भारतीय मुद्रा पर काफी बड़े स्तर पर पड़ा है। तेल की कीमतें बढ़ने का कारण भी यही है। भारत जितनी भी चीजें आयात कराता है उसके लिए वह डॉलर का इस्तेमाल करता है। पिछले कुछ महीनों में रुपया डॉलर के मुकाबले 4 रुपए तक कमजोर हुआ है। जिस वजह से अचानक ही महंगाई ने दस्तक दी है। भारत तेल का आयात बहुत बड़े स्तर पर करता है। जिसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। तेल महंगा होने से अन्य चीजें भी महंगी हो रही हैं।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैली मंदी की बात करें तो इस समय यूरोप मंदी के हाल से बदहाल होकर डिप्रेशन में है। वहां की मुद्रा यूरो भी अपने निम्न स्तर पर है। अभी तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में लोग यूरो या डॉलर में ही बड़े स्तर पर निवेश करते रहे हैं। अब यूरो काफी कमजोर पड़ गया है। जिस वजह से लोग यूरो की जगह डॉलर में निवेश कर रहे हैं। जिससे डॉलर में मजबूती आई है। जिसका असर भारत की मुद्रा पर पड़ रहा है। भारत में विदेशी मुद्रा निवेश भी ज्यादा डॉलर में ही होता है। अब डॉलर की निकासी की वजह से रुपया और भी नीचे गिर रहा है। हालांकि रुपये को मजबूत बनाए रखने के लिए आरबीआई ने कड़े प्रावधान तय किए हैं पर यह कमतर नजर आ रहे हैं।












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