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न विपक्ष न पीएम, किसी ने नहीं की लोकपाल बिल की बात

Sushma Srivastava, LK Advani, Manmohan Singh, Meira Kumar
नई दिल्‍ली (अजय मोहन)। जिस लोकपाल बिल के कारण मॉनसून सत्र हंगामें की भेंट चढ़ गया, अन्‍ना हजारे ने 12 दिन तक कुछ खाया नहीं, उस लोकपाल बिल की चिंता न तो विपक्षी दलों को है और न ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को। जी हां हम उसी लोकपाल बिल की बात कर रहे हैं, जिसका इंतजार हिन्‍दुस्‍तान की जनता को पिछले कई महीनों से है।

सबसे पहले हम ले चलते हैं विपक्षी दलों भाजपा और लेफ्ट पार्टियों की उन बैठकों में जहां लोकपाल बिल का जिक्र तक नहीं हुआ। भाजपा नेताओं ने सोमवार को लाल कृष्‍ण आडवाणी के आवास पर एक महत्‍वपूर्ण बैठक बुलाई, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि वो यूपीए से उस बहिष्‍कार का बदला लेगी, जो यूपी ने जॉर्ज फरनांडीज के साथ किया था। भाजपा ने लोकसभा स्‍पीकर को मंगलवार की सुबह नोटिस दे दिया कि वो पी चिदंबरम का भी ठीक उसी प्रकार बहिष्‍कार करेगी। यानी जैसे ही चिदंबरम सदन में आयेंगे वैसे ही एनडीए के सभी नेता बाहर चले जायेंगे। मुद्दा था 2जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटाला। वहीं वाम दलों ने स्‍थगन प्रस्‍ताव लाने का नोटिस दिया, जिसमें महंगाई को मुद्दा बनाया गया। लेकिन किसी ने भी लोकपाल बिल की बात नहीं की।

अब बात अगर प्रधानमंत्री की बात करें तो संसद में जाने से ठीक पहले मीडिया से बात करते हुए उन्‍होंने सदन में जाने से पहले विपक्षी दलों से अपील की वो किसी भी प्रकार का बहिष्‍कार नहीं करें। उन्‍होंने कहा विपक्ष से अपील की कि वो हंगामा करने के बजाये विकास के मुद्दों पर अपना समर्थन दें। मनमोहन ने कहा कि किसी का बहिष्‍कार करने और हंगामा करने से सदन की कार्यवाही में व्‍यवधान होगा और उससे देश के सर्वांगीण विकास में रुकावटें पैदा होंगी। बेहतर होगा सदन की कार्यवाही के लिए अपना सहयोग प्राप्‍त करें।

गौर करने वाली बात यह है कि मनमोहन सिंह ने यह तो कहा कि वो विकास के मुद्दे सदन में लायेंगे, लेकिन मुद्दे क्‍या हैं, यह नहीं बताया। खास बात यह है कि उन्‍होंने लोकपाल बिल का नाम तक नहीं लिया।

अब सवाल यह उठता है कि एक 74 वर्षीय व्‍यक्ति (अन्‍ना हजारे) जिस बिल के लिए अपनी जान हथेली पर रख देता है, जिसके पीछे 100 करोड़ लोग आंख मूंद कर चल देते हैं, उसकी किसी भी नेता को चिंता नहीं। खैर राजनीतिक पहलुओं पर गौर करें तो उन्‍हें चिंता नहीं होने के कई कारण हैं-

1. लोकपाल आया तो वो खुद भी नप सकते हैं।
2. बिल पास होने से कांग्रेस के प्रति लोगों का विश्‍वास बढ़ सकता है, यह विपक्ष नहीं चाहेगा।
3. भ्रष्‍टाचार का मामला उठाने से सीधे मंत्रियों पर वार करने में विपक्ष को आसानी होगी।
4. काले धन का मामला उठाने से सत्‍ता पक्ष के नेताओं को कठघरे में खड़ा करना आसान होगा।
4. महंगाई के विरोध में बात करने से जनता का विश्‍वास हांसिल करने में आसानी होगी।

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