गुजरात पुलिस पर भारी पड़े दो मुठभेड़

वर्ष 2007 में गुजरात पुलिस की ओर से गठित विशेष दल ने उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर यह निष्कर्ष निकाला था कि मुठभेड़ नकली थी और इस मामले में तीन आईपीएस अधिकारी गिरफ्तार किये गए। फर्जी मुठभेड़ में शेख और उसकी पत्नी एवं इस मामले में गवाह कौसर बी की हत्या के लिए 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किये गए लोगों में गुजरात के पूर्व गृह मंत्री अमित शाह, चार निलंबित आईपीएस अधिकारी डी जी वंजारा, दिनेश एम एन, राजकुमार पांडियन और अभय चूड़ास्मा शामिल हैं।
प्राथमिकी के अनुसार इशरत और तीन अन्य जावेद शेख उर्फ प्रणेश पिल्लई, अमजद अली राणा और जिशान जौहर पुलिस के साथ 15 जून 2004 को हुई मुठभेड़ में मारे गए थे। अहमदाबाद अपराधा शाखा ने दावा किया कि वे आतंकवादी थे जो मोदी की हत्या करने के लिए आये थे। पुलिस के एक अन्य भुठभेड़ जिसे फर्जी घोषित किया गया है वह वर्ष 2004 में मुम्बई की लड़की इशरत जहां और तीन अन्य का है।
उच्च न्यायालय ने आज कहा कि इशरत जहां मुठभेड़ की असलियत का पता लगाने के लिए उसने जो विशेष जांच दल का गठन किया था पाया है कि मुठभेड़ फर्जी थी। मुठभेड़ प्राथमिकी में दर्ज तिथि और समय से पहले हुई थी । इस मामले की जांच का निरीक्षण सीधे तौर पर उच्च न्यायालय ने की थी जिसने गत वर्ष इसकी सचाई का पता लगाने के लिए एसआईटी का गठन किया था।
एसआईटी का गठन इशरत की मां शमिमा कौसर और प्रणेश पिल्लई के पिता गोपीनाथ पिल्लई की ओर से दायर याचिकाएं दायर किये जाने के बाद किया था। इन याचिकाओं के जरिये मुठभेड़ पर पुलिस के दावे पर सवाल उठाये गए थे। गत 16 जून को उच्च न्यायालय ने वर्ष 2003 में हुई उस पुलिस मुठभेड़ मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिये जिसमें सादिक जमाल मेहतर मारा गया था। इस मुठभेड़ वंजारा सहित पुलिस के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल थे।












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