लोकपाल हो जाएगा टिन के डिब्बे के समानः टीम अन्ना

टीम अन्ना की ओर से सोमवार को जारी बयान के मुताबिक अन्ना ने अगस्त में अपना अनशन पीएम व संसद के भरोसे के बाद समाप्त किया था। संसद ने इस मामले पर लंबी चर्चा के बाद सदन की भावना प्रकट की थी और पीएम ने अपने पत्र में इसे प्रस्ताव बताया था। इसमें साफ तौर पर कहा गया था कि एक ही केंद्रीय कानून के जरिये राज्यों में लोकायुक्त का भी गठन किया जाएगा। इसी तरह सिटीजन चार्टर और सभी सरकारी कर्मचारियों को इसके तहत शामिल किया जाएगा, लेकिन जिस तरह की खबरें संसदीय समिति के बारे में आ रही हैं, उनके मुताबिक यह ऐसा नहीं करने जा रही।
सिटीजन चार्टर को इसमें शामिल नहीं कर अलग से बिल लाया जा रहा है, वह भी बेहद कमजोर प्रावधानों वाला है। इसी तरह सिर्फ ग्रुप ए और बी के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने का प्रस्ताव किया जा रहा है। जबकि आम जनता को सबसे ज्यादा ग्रुप सी और डी के कर्मचारियों के भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। टीम अन्ना ने सीबीआई को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने का भी पुरजोर विरोध किया है। इसका कहना है कि अगर लोकपाल भ्रष्टाचार के मामलों की जांच ही नहीं कर सकेगा, तो फिर इसका मतलब ही क्या होगा।
वैसे भी सीबीआई सरकार के सीधे नियंत्रण में काम करती है। ऐसे में इससे सरकारी मंत्रियों और बड़े अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच की कैसे उम्मीद की जा सकती है। वहीं लोकपाल पर गठित स्थायी समिति के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि लोकपाल व्यवहारिक है और इस प्रस्ताव को ही संसद में पारित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।












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