पेट्रोलियम पदार्थो के दाम घटाने से बढेगा सरकार पर बोझ: मनमोहन

मनमोहन ने दक्षेस सम्मेलन से लौटते हुये कल संवाददाताओं के साथ बातचीत में कहा कि और ज्यादा सब्सिडी देने से बजट की स्थिति और बिगड़ेगी और यदि बजट गड़बड़ाता है तो एक बार फिर से मुद्रास्फीति अपना सिर उठाने लगेगी। प्रधानमंत्री ने कहा मुद्रास्फीति जो आज हर व्यक्ति के लिये बड़ी चिंता बन चुकी है उसके पीछे की एक सबसे बड़ी वजह ईंधन उत्पादों के दाम में वृद्धि होना है।
उन्होंने कहा कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कुल खपत का 75 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात के जरिये पूरा होता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। उन्होंने कहा कि बजट से दी जाने वाली सब्सिडी राशि पहले ही 1,50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है और स्पष्ट तौर पर कहें तो यह स्थिति लंबे समय तक नहीं चल सकती है।
उन्होंने कहा कि इसलिये मैं यह कहना चाहता हूं कि सभी देशवासियों को यह मानना चाहिये कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ने पर एक निश्चित सीमा के बाद हमारा कोई नियंत्रण नहीं रह पाता है। उल्लेखनीय है कि तेल कंपनियों ने इस महीने की शुरुआत में ही पेट्रोल के दाम में 1.80 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने और डालर की तुलना में रुपये के कमजोर पड़ने से दाम बढ़ाने पड़े।












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