मुसलमानों के लिए दारुल उलूम से जारी कुछ खास फतवे

फरवरी 2011 में दारुल उलूम ने कहा था कि मुस्लिम धर्म में गर्भपात कराना इस्लाम के खिलाफ है। इस फतवे में कहा गया था कि गर्भपात पूरी तरह तब तक हराम है, जब तक कोई हकीम या मुस्लिम डॉक्टर इसकी सलाह नहीं दे। इस फतवे पर लंबी बहस चली थी और महिलाओं ने अपने शरीर पर अधिकार की बात उठायी थी।
समाज में बढ़ते लिवि इन रिलेशनशिप के मामलों को देखते हुए अगस्त 2010 में इसके खिलाफ फतवा जारी हुआ। फतवे में कहा गया कि बगैर निकाह किये लिवि-इन रिलेशन में रहना इस्लाम धर्म के विरुद्ध है यह सरासर पाप है। मुस्लिम संगठन मजलिस-ए-शूरा ने लिव इन रिलेशन को हराम करार देते हुए टीवी कलाकार सहरीश खान और उनके प्रेमी जहांगीर खान को मुस्लिम समाज से बाहर करने का फरमान जारी कर दिया।
अगस्त 2010 में ही एक और फतवा जारी हुआ था, जिसमें मंगेतर से बात करने को पाप करार दिया गया था। फतवे के मुताबिक यदि कोई मुस्लिम लड़की या लड़का सगाई के बाद अपने मंगेतर से फोन पर भी बात करता है, तो वो इस्लाम की नज़र में पाप है। दारूल उलूम की वेबसाइट पर निकाह संबंधी मामलों में एक प्रश्न के जवाब के बाद यह फतवा जारी किया गया था।
इससे पहले 2009 में दारुल उलूम ने वंदे मातरम् गीत के खिलाफ भी फतवा जारी किया था। उस दौरान यह कहा गया था कि मुस्लिम समाज के लोगों को वंदे मातरम गीत नहीं गाना चाहिये। इसके अलावा शोब मलिक और सानिया मिर्जा की शादी को मानने से इनकार करने के फतवे के अलावा बाबा रामदेव के शिविर में मुसलमानों को नहीं जाने की सलाह देने की बात भी कही जा चुकी है।












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