सीबीआई के शिकंजे में यूपी के फर्जी नेत्र चिकित्सालय

एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने लखनऊ के दस नामी नेत्र चिकित्सालयों और उन्हें चलाने वाले एनजीओ के कार्यालय पर छापेमारी की। इस छापेमारी में यह खुलासा हुआ है कि कई सालों से यह चिकित्सालय फर्जी तरीके बिना सरकारी अनुमति के चल रहे थे। छापों के दौरान तमाम फर्जी बिल और दस्तावेज बरामद किये गये थे। यही नहीं दस्तावेजों को खगालने पर यह भी सामने आया कि दस्तावेजों में दिखाये गये करीब आधे आपरेशन फर्जी थे और कई ऐसे लोगों का आपरेशन दिखाया गया जो मौजूद ही नहीं हैं।
जांच में यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि ये अस्पताल सिर्फ एक वर्ष तक आपरेशन के लिए अधिकृत थे लेकिन यह सीमा समाप्त होने के बाद भी वे धड़ल्ले से आपरेशन करते रहे और बिल जमा करते रहे हैं। यह आशंका जाहिर की जा रही है कि इन अस्पतालों को सरकारी छत्रछाया मिली रही है। बहरहाल तमाम बिल, फर्जी दस्तावेज आदि बरामद किये हैं और अब वह जल्द गिरफ्तारियां शुरु कर सकती है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा.विनोद आर्य व डा.वीपी सिंह की हत्या के बाद स्वास्थ्य विभाग में एनआरएचएम योजना में घोटालों की जांच कर रही सीबीआई को जब्त दस्तावेजों की जांच में सबसे अधिक गड़बड़ी राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत ही मिली है इसमें गड़बड़ी के आधार पर एक संविदा कर्मचारी को पहले ही गिरफ्तार कर पूछताछ की जा चुकी है। सीबीआई ने गिरफ्तार संविदा कर्मी से पूछताछ व जब्त दस्तावेज की छानबीन के बाद मोतियाबिंद का आपरेशन कर रहे राजधानी के दस निजी चिकित्सालयों को खंगालने का निर्णय लिया।












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