बच्चों के लिए विशेष किशोर पुलिस अधिकारी

आगरा, आजमगढ, इलाहाबाद, कानपुर, गोरखपुर, चित्रकूट, बरेली, वाराणसी व झांसी मण्डल के सभी जिलों में नामित पुलिस अधिकारी बाल कल्याण अधिकारी व जिला प्रोबेशन अधिकारियों की बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना की रणनीति तैयार की गयी। बैठक में मुख्य रूप से अपचारी किशोरों के वादों के त्वरित निस्तारण, देख रेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की घर वापसी, दत्तक ग्रहण एवं जिला स्तर पर बच्चों से संबंधित मामलों के निस्तारण के लिए अधिनियम में दी गई व्यवस्था के अनुरप पुलिस की भूमिका पर परिचर्चा की गयी।
ज्ञात हो कि आम तौर पर देखा गया है कि जब भी किसी अपराध में बच्चे को पकड़ा जाता है तो उस मामले की भी जांच सामान्य मामलों की तरह होती है जिससे महीनों बच्चों को बंदी गृह में ही बिताने पड़ जाते हैं इसके बाद यदि पुलिस सबूत नहीं जुटा पाती तो बच्चों को छोड़ दिया जाता है। इस समय के दौरान बच्चे अपराधियों व पुलिस के बीच रहकर अपराध की दुनिया से रूबरू होते हैं जो उनके कोमल मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि कई बार इसी कारण बच्चे अपराध की दुनिया में चले जाते हैं। इस व्यवहारिक समस्या को देखते हुए सरकार ने जिलों के थानों में विशेष किशोर पुलिस अधिकारी नामित कर दिए हैं। बैठम में महिला कल्याण विभाग की संस्थाओं, अधिकारीगण बाल कल्याण समिति एवं किशोर न्याय बोर्ड के मध्य सामंजस्य बनाकर बाल हित वातावरण का निर्माण करने तथा बच्चों के पुनर्वास के कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं बनायी गयीं।












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