आंदोलनकारी-सरकार के बीच सेतु क्यों बनते हैं श्री श्री रविशंकर!

अपना अनशन ना तोड़ने पर जुटे योग गुरू बाबा रामदेव को आखिर श्री श्री रविशंकर ने ऐसी कौन सी घुट्टी पिलाई कि बाबा रामदेव ने अपनी जिद छोड़ते हुए अपना अनशन तोड़ दिया। श्री श्री रविशंकर ही थे जिन्होंने मीडिया को पूरा भरोसा दिलाया था कि उनके कहने पर बाबा रामदेव हर हालत में अपना अनशन तोड़ देगें और वो ही हुआ।
अब बात करते हैं समाजसेवी अन्ना हजारे की। जिन्हें अनशन करने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने 16 अगस्त को गिरफ्तार करके तिहाड़ जेल भेज दिया। जहां अन्ना टीम का भी कोई सदस्य अन्ना से मिल नहीं पा रहा था, वहां श्री श्री रविशंकर ही अकेले थे जिन्होंने तिहाड़ जेल के भीतर जाकर अन्ना से बात की थी। उनके साथियों ने अन्ना और श्री श्री रविशंकर की एक फोटो भी मीडिया में प्रसारित की थी। अन्ना तिहाड़ से बाहर नहीं आने की जिद किये बैठे थे। लेकिन श्री श्री रविशंकर बार-बार कह रहे थे कि वो अन्ना को मना लेगें और लंबी बातचीत के बाद अन्ना मान गये और तिहाड़ से बाहर आ गये हालांकि उनके अनशन की जगह जेपी पार्क से रामलीला मैदान हो गयी।
एक बार फिर से सफल साबित हुआ श्री श्री रविशंकर का प्रयास। इसमें कोई शक नहीं कि श्री श्री रविशंकर का अपना एक वृहद क्षेत्र हैं जिसको लोग फालो करते हैं। उनका एक विदेशी बड़ा वर्ग भी फालोअर है। उनके ज्ञान और क्षमता पर किसी को शक नहीं लेकिन सोचने वाली बात यह है कि आखिर वह ही हमेशा आंदोलनकारी और सरकार के बीच सेतु क्यों बनते हैं? और औरों की तरह वह किसी राजनीतिक मंच का सहारा क्यों ले रहे हैं? वो भाजपा के मंच पर क्यों देखें जा रहे हैं? जबकि सब जानते हैं कि उनकी बातों को लोग बिना किसी सहारे के ही सुनते हैं?
गौरतलब है कि ऑर्ट ऑफ लिविंग फ़ाउंडेशन के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर 7 नवंबर से उत्तर प्रदेश की यात्रा पर होंगे और उनकी यह यात्रा भ्रष्टाचार के खिलाफ़ होगी। गौरतलब है कि यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। धर्म गुरू रविशंकर जौनपुर से अपनी यात्रा की शुरुआत करेंगे और 10 नवंबर को वह सुबह सुल्तानपुर में होंगे तो शाम को कानपुर में अभियान चलाएँगे। इस दौरान वह अमेठी भी जायेगें जो कि ऱाहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है।












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