मिर्चपुर प्रकरण: दोनों पक्ष जाएंगे हाईकोर्ट

Mirchpur victims to appeal in HC
हिसार। मिर्चपुर प्रकरण में सोमवार को दिल्ली की रोहिणी अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। मिर्चपुर में अधिकतर लोग खुश हैं तो वाल्मीकि समुदाय के कुछ लोग नाखुश हैं। जैसे ही फैसले की खबर पुलिस प्रशासन को मिली तो वह एकदम से हरकत में आया और वाल्मीकि बस्ती के चारों तरफ सुरक्षा को और बढ़ा दिया गया। दोनों ही पक्षों ने फैसले को लेकर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी। दोनों ही पक्ष हाईकोर्ट में जाकर अपील करेंगे। पुलिस प्रशासन फैसले को लेकर पहले से ही तैयार था।

अनेक उतार-चढ़ाव से गुजरा प्रकरण

मिर्चपुर प्रकरण को लेकर काफी समय से गांव वालों को फैसले का इंतजार था। आखिरकर इस प्रकरण में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिले। दिल्ली की रोहिणी कोर्ट की जज डा. कामिनी लाऊ ने गत 24 सिंतबर को 98 आरोपियों में से 82 युवकों को रिहा कर दिया था। उसके बाद फैसले की तिथि 4 अक्तूबर रखी गई, लेकिन फैसला न आ सका।

उसके बाद 14 अक्तूबर को फिर सजा सुनाने की तिथि रखी गई, लेकिन किन्हीं कारणों से उस दिन भी फैसला न आ सका। आखिरकर 31 अक्तूबर को कोर्ट ने 15 युवकों के खिलाफ फैसला सुना ही दिया। फैसला सुनने के लिए दोषी करार दिए गए 15 युवकों के परिजनों सहित सैकड़ों ग्रामीण दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में डेरा डाले हुए थे। जिन युवकों को उम्रकै द की सजा हुई है उनके परिजन इस फैसले से नाराज नजर आए और वो अपनी आंखों के आंसू रोक नहीं पाए।

वाल्मीकि समुदाय के सत्यवान ने बताया कि हमारे साथ काफी अन्याय हुआ था। हमें अदालत से काफी उम्मीदें थी लेकिन अदालत का फैसला हमारी सोच के अनुरूप नहीं आया। इस कांड के ज्यादातर दोषियों को रिहा कर दिया। बहुत ही कम लोगों को सजा दी गई है। हम इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेगें। वहीं मृतक ताराचंद की पत्नी कमला देवी ने भी फैसले को लेकर अपनी नाराजगी जताई। शांति सभा के अध्यक्ष मास्टर चंद्रप्रकाश ने कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि कोर्ट ने जो भी फैसला सुनाया है, वो हमें मंजूर है।

जिन युवकों को सजा हुई है उनकी रिहाई के लिए हम हाईकोर्ट में अपील दायर करंेगे। गांव में छतीस बिरादरी का भाइचारा कायम है। सभी बिरादरियों को साथ में लेकर चलेंगे। पिछले काफी समय से गांव की शांति भंग थी, लेकिन अदालत के फैसले से गांव में एक बार फिर भाइचारा कायम हुआ है। कुछ लोग फैसले को लेकर असंतुष्ट हैं। उन्हें मना लिया जाएगा कि गांव में शांति बहाल करने के लिए आगे प्रयास जारी रहेंगे।

कड़ी रही सुरक्षा व्यवस्था

शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी मजिस्टे्रट के तौर पर नारनौंद के तहसीलदार राजेश कुमार को तैनात किया गया था, वहीं पुलिस प्रशासन की तरफ से डीएसपी अमरीक सिंह, लालसिंह और राजेन्द्र सिंह को भी तैनात किया गया था और चार रिर्जव पुलिस फोर्स भी तैनात की गई थी। वहीं पहले से ही एक कंपनी सीआरपीएफ 178 हरियाणा पुलिस के जवान तैनात थे। फैसले के बाद गांव में पूर्ण रूप से शांति का माहौल है। मृतक ताराचंद के बेटे अमरलाल ने फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि हमने अपनी तरफ से गवाहियां पूरी तरह से ठोक कर दी थी, लेकिन कोर्ट ने ज्यादातर दोषियों को बरी कर दिया। हम इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेगें। सरकार ने हमारे साथ अन्याय किया है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+