सुप्रीम कोर्ट ने सिरसा भूमि अधिग्रहण रद किया

सूत्रों ने बताया कि इस अधिग्रहण को भूमि के स्वामियों ने यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी कि सरकार ने जमीन अधिग्रहीत करने से पहले उन्हें सुनवाई का मौका नहीं दिया। हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद भू-स्वामियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी व न्यायमूर्ति सुधांशु ज्योति मुखोपाध्याय ने दर्शन लाल व अन्य भूस्वामियों की याचिका स्वीकार करते हुए अधिग्रहण की अधिसूचना रद कर दी है। इससे पहले उनके वकील ऋषि मल्होत्रा ने दलील दी थी कि सरकार ने अधिग्रहण से पहले धारा-5(ए) में उनके मुवक्किलों को सुनवाई का मौका नहीं दिया।
हालांकि हाईकोर्ट ने उनकी यह दलील नहीं मानी थी और राज्य सरकार की उस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था जिसमें आपत्तियां सुने जाने की बात कही गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद पाया कि अधिग्रहण अधिकारियों ने ज्यादातर आपत्तियां बिना सोचे विचारे मशीनी ढंग से निपटा दी थीं। लगभग सभी मामलों में लिख दिया गया था कि भू-स्वामी ज्यादा मुआवजा लेना चाह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में याचिकाकर्ता की आपत्तियों को दर्ज किया है जिसमें कहा गया है कि उनकी जमीन ज्यादा बहुमूल्य है और राष्ट्रीय राजमार्ग के पास है इसके अलावा और भी कई आधार दिए गए थे, लेकिन रिपोर्ट में इन्हें शामिल नहीं किया गया था। रिपोर्ट में उनकी सुनवाई होने का भी कोई साक्ष्य नहीं था।












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