पोती को देख पिघल गये बहू पर केस करने वाले ससुर

खिचड़ीपुर की कविता की शादी 2009 में दयाशंकर से हुई थी। इस शादी से दोनों को 2010 में एक बेटी हुई, लेकिन उसकी ससुराल वालों से नहीं बनी और वह मायके आ गई। उसका आरोप था कि उसके सास-ससुर उसे दहेज के लिए परेशान करते हैं। दयाशंकर ने कविता को वापस बुलाने के लिए अदालत की शरण ली। अदालत में पहली सुनवाई पर लड़के के माता-पिता और लड़की मां और भाई पेश हुए। यहां पर पोती को देखकर सास -ससुर की आंखों से आंसू छलक पड़े।
उन्होंने उसे गोद में ले लिया। इस पर अचानक माहौल बदल गया। बहू ने कहा कि अब मेरी कोई शिकायत नहीं है। वह घर में जाना चाहती है। बहू के अधिवक्ता मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि वह अपनी ससुराल जाना चाहती है इसलिए उसे लड़के के साथ भेज दिया जाए। अदालत ने लड़की से राय पूछी तो उसने कहा कि सास-ससुर उसे परेशान न करें तो उसे वापस जाने में कोई आपत्ति नहीं है। जवाब सुनकर अदालत ने लड़की को लड़के के साथ भेज दिया।
उधर, एक और मामले का सुखद अंत हुआ। जो केस सालों से खिंच रहे हैं मीडिएशन सेंटर में बातचीत से निबटारा हो रहा है। ऐसे ही एक मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट के मीडिएशन सेल ने दंपति में समझौता करवाया है। पूर्वी दिल्ली निवासी दंपति में काफी समय से घरेलू हिंसा, गुजारा भत्ता के केस चल रहे थे। उनका विवाह जून 2007 में हिंदू रीति से हुआ था। एक बेटी भी पैदा हुई लेकिन मतभेद इतने बढ़े कि गृहस्थी टूटने के कगार पर पहुंच गई। पत्नी ने पति और ससुराल वालों पर घरेलू हिंसा का केस कर गुजारा भत्ते की मांग कर दी। लेकिन पति और ससुराल वाले कुछ देना नहीं चाहते थे।
समझौते की गुंजाइश के मद्देनजर कोर्ट ने केस को मीडिएशन सेल में भेज दिया। यहां पर मीडिएटर केके त्यागी ने दोनों पक्षों को सुना। उन्हें यह लगा कि दोनों पक्षों में छोटी-छोटी बातों पर गलतफहमी थी जो बढ़ गई। दोनों पक्षों को उन्होंने समझाया और समझौते के लिए तैयार कर लिया। समझौते के मुताबिक पति-पत्नी किराए के मकान में रहेंगे और ससुराल वालों का दखल नहीं होगा। दंपति के ससुराल वाले त्योहार और खास मौकों पर उनसे मिल सकते हैं लेकिन निजी जिंदगी में दखल नहीं देंगे।












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