शोध कार्य के लिए भारत आना चाहती थी हिलेरी क्लिंटन

hillary clinton
न्यूयार्क। वर्ष 1960 के दशक में वेलेस्ले के प्रतिष्ठित लिबरल आट्र्स कालेज की छात्रा के तौर पर अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने फुलब्राइट स्कोलर के तौर पर भारत आने की उम्मीदें पाली थीं लेकिन भूराजनैतिक कारणों की वजह से ऐसा नहीं हो सका। हिलेरी ने अपना यह कार्यक्रम याले में पूरा किया था। हिलेरी ने कहा कि जब मैं वेलेस्ले में सीनियर थी तब मेरी प्राथमिकता फुलब्राइट शोध कार्यक्रम के लिए भारत जाने की थी।

भूराजनैतिक कारणों की वजह से फुलब्राइट कार्यक्रम में रूकावट आने के बाद हिलेरी को शोध के लिए याले विधि कालेज में जाना पड़ा। मैसाचुसेट्स के महिलाओं के लिबरल आट्र्स कालेज से 1969 में स्नातक की पढाई पूरी करने वालीं हिलेरी ने वाशिंगटन में एक भाषण के दौरान कहा कि वह वेलेस्ले से स्नातक के बाद भारत जाना चाहती थीं। फुलब्राइट शोध कार्यक्रम का नाम अमेरिकी सीनेटर जे विलियम फुलब्राइट के नाम पर रखा गया है जिसकी शुरूआत 1946 में हुई थी।

अमेरिका के शिक्षा एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग द्वारा प्रायोजित इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में अमेरिकी और विदेशी छात्रो, शोधार्थियों, अध्यापकों और पेशेवरों को स्नातक अध्ययन, आधुनिक शोध, विश्वविद्यालय शिक्षा जैसे कार्यो के लिए कोष उपलब्ध कराया जाता है। शोध कार्य के लिए भारत आना चाहती थी हिलेरीं क्लिंटन लेकिन भूराजनैतिक कारणो की वजह से वह नहीं आ सकी। अब उनको अफसोस हसे रहा है कि वह भारत आकर अपना शोध कार्य पूर्ण नहीं कर सकी।

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