बच्चों को नहीं, सिस्टम को बदलो मूर्ति जी : चेतन भगत
स्टार न्यूज से बातचीत करते हुए चेतन भगत ने कहा कि आईआईटी का स्तर अगर गिर रहा है तो इसके लिए सिस्टम को बदलने की जरूरत है, बच्चों को दोष देना का क्या मतलब है? चेतन भगत ने आगे कहा कि मूर्ति ने आहत होकर बोल दिया कि 80 प्रतिशत आईआईटी के बच्चे बेकार है, ना तो उनके पास इस बात कोई ठोस आधार है और ना ही उन्होंने कोई सर्वे कराया है। जिसके दम पर उन्होंने इतनी बड़ी बात बोल दी। अगर मैं कहूं कि देश का सारा मीडिया बिका हुआ है तो क्या वो सही होगा इसलिए मैनें मूर्ति साहब का विरोध किया था। अन्यथा मेरी कोई निजी कड़वाहट उनसे नहीं है,वो देश के अभिन्न हीरे हैं उनके बारे में मैं क्या कह सकता हूं।
अपनी नयी किताब जिसका नाम रिव्लूयशन 2020 है के बारे में चेतन ने कहा कि ये बनारस की क्रांति की किताब है। उन्हें उम्मीद है कि लोग इसे पसंद करेगें। अपने आप को आम नागरिक बताते हुए चेतन भगत ने कहा कि अगर हम अपनी शिक्षा प्रणाली को थोड़ा सा बदल दें तो मूर्ति जी की समस्या दूर हो जायेगी। अगर हम विदेशों की तर्ज पर एसआईटी जैसे एग्जाम कराने लग जायें तो शायद जीईई इतना कठिन नहीं रह पायेगा। कुछ इसी तरह के सुझाव मूर्ति साहब को देने चाहिए थे ना कि बच्चों पर आरोप मढ़ना चाहिए था।
गौरतलब है कि इन्फोसिस के संस्थापक एन आर नारायणमूर्ती ने टीवी चैनल पर बात करके कहा था कि कोचिंग सैंट्ररों ने आईआईटी का स्तर गिरा दिया है। बच्चे रट-रटाकर पास हो जाते हैं और जब नौकरी में आते हैं तो वो उतना अच्छा नहीं कर पाते जितना उनसे अपेक्षा की जाती है। इससे आईआईटी का नाम खराब होता है।













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