बवाल मचने के बाद चेतन भगत ने मूर्ति से माफी मांगी

बस उनसे आईआईटी के बच्चों पर प्रहार नहीं झेला गया जो कि बड़ी मेहनत और तपस्या के बाद वहां पहुंचते हैं जहां जाना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। आईआईटी आज भी कंपनियों की पहली पसंद है। अगर बदलाव लाना है तो यूनिवर्सिंटी के टीचरों में लाइये। बच्चों की आलोचना करने से क्या मिलेगा। ये कोई इतिहास का विषय नहीं है जो लोग रट्टा लगाकर पास हो जायें।
गौरतलब है कि चेतन ने सोशल नेटवर्किंग साइट्स टि्वटर पर टि्वट किया था कि किसी ऐसे व्यक्ति की तरफ से यह वक्तव्य बिल्कुल नहीं आना चाहिए जो खुद इस तरह की एक हाई-टेक संस्था को चला रहा हो। भगत ने आगे लिखा है कि इन्फोसिस की सफलता के पीछे आईआईटी ही है इसलिए कम से कम मूर्ति को कुछ भी कहने से पहले एक बार तो इस विषय पर सोचना चाहिए था।
आपको बता दें कि इन्फोसिस के संस्थापक एन आर नारायणमूर्ती ने टीवी चैनल पर बात करके कहा था कि कोचिंग सैंट्ररों ने आईआईटी का स्तर गिरा दिया है। बच्चे रट-रटाकर पास हो जाते हैं और जब नौकरी में आते हैं तो वो उतना अच्छा नहीं कर पाते जितना उनसे अपेक्षा की जाती है। इससे आईआईटी का नाम खराब होता है।












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