हरियाणावी फिल्म 'चंद्रावल-2' की शूटिंग शुरू

चंद्रावल-2 फिल्म का निर्देशन दिनेश टूण्डवाल कर रहे है, जिनकी यह पहली फिल्म होगी। इससे पहले वह दूरदर्शन के लिए कई हिन्दी धारावाहिकों एवं वृत्तचित्रों का निर्देशन भी कर चुके है और इस क्षेत्र में काफी अनुभव रखते है। टूण्डवाल ने बताया कि फिल्म की कहानी की शुरूआत उसी जगह से होती है, जहां से चंद्रावल फिल्म का अंत होता है। लेकिन नये परिवेश के अनुसार कहानी कई ऐसे मोड़ लेती है जिससे दर्शकों की रूचि फिल्म में बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि फिल्म की पटकथा विशेष रूप से संवाद को लेकर काफी शोध कार्य किया गया है और पूरा प्रयास किया गया है कि हरियाणवी संस्कृति और भाषा एक सशक्त रूप से उभरे। लेकिन यह भी ध्यान रखा गया है कि हरियाणवी की कम समझ रखने वाला व्यक्ति भी इसे समझ सके। हरियाणवी भाषा आज पॉप गायकी के रूप में बढ़ते फूहड़पन और शोर-शराबे का शिकार होती जा रही है, जिस कारण इसकी पहुंच काफी समिति रह गई है।
सह निर्माता-निर्देशक निशांत प्रभाकर ने बताया कि चंद्रावल अपने दौर की एक म्युजिकल हिट रही है और चंद्रावल-2 के गीत एवं संगीत को लेकर दर्शक की बड़ी अपेक्षाएं होना स्वाभाविक है। यही कारण है कि चंद्रावल-2 की घोषणा के बाद हमने सोचने के लिए कुछ समय लिया। यकीनन फिल्म की कहानी काफी दिलचस्प है और कहानी की मांग के अनुसार ही फिल्म में संगीत को योजनाबद्ध किया गया है। फिल्म के गीत प्रख्यात हरियाणवी साहित्यकार स्वर्गीय देवीशंकर प्रभाकर द्वारा लिखी गई रचनाओं पर आधारित है, जिन्हें सुप्रसिद्ध संगीतकार उत्तम सिंह के निर्देशन में बखूबी सुरों में पिरोया है, जो 'दिल तो पागल है', 'गदर', 'बागबान' जैसी सुपरहिट फिल्म का संगीत दे चुके है। गीतों को हिन्दी फिल्मों के सुप्रसिद्ध गायक उदित नारायण, शान, ऋचा शर्मा के अलावा इंडियन आइडिल की खोज रही स्मिता अधिकारी और सोनू कक्कड़ एवं अनुपमा देशपांडे्य ने अपनी आवाज दी है। फिल्म में कोरियोग्राफी लीला सैनी कर रही है, जो इस क्षेत्र में काफी अनुभव रखती है और काफी समय से हरियाणवी लोकनृत्य के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं।
चंद्रावल फिल्म की अभिनेत्री रह चुकी फिल्म की निर्माता ऊषा शर्मा ने बताया कि 'चंद्रावल-2' प्रसिद्ध हरियाणवी निर्माता-निर्देशक दिवंगत देवी शंकर प्रभाकर का एक ड्रीम प्रोजेक्ट था लेकिन किसी कारणवश वे इसे पूरा नहीं कर सके थे। प्रभाकर फिल्म्स बैनर को वैसे तो चंद्रावल के लिए विशेष रूप से जाना जाता है, लेकिन चंद्रावल के पश्चात इस बैनर के नीचे बनी अन्य फिल्मों नामत: लाडो बसंती (1985), फूल बदन (1986), और जाटणी (1991) जैसी सुपरहिट हरियाणवी फिल्मों को भी उत्तरी भारत में काफी सराहा गया। श्रीमती शर्मा ने बताया कि चंद्रावल फिल्म आज भी हरियाणवी जनजीवन में एक अलग पहचान रखती है और 'चंद्रावल-2' के निर्माण का उद्देश्य हरियाणवी संस्कृति को उसकी सही पहचान और लोकप्रियता दिलाना है। चंद्रावल फिल्म को क्षेत्रीय भाषी फिल्मों में एक मील का पत्थर माना जाता है। यह फिल्म उस दौर में आई थी, जब हरियाणवी फिल्म उद्योग लगभग लुप्त होने के कगार पर था और अपने समय में इस फिल्म ने कई समकालीन सुपरहिट हिन्दी फिल्मों को भी मात दी थी और उत्तरी भारत में लोकप्रियता के कई नये कीर्तिमान स्थापित किये थे। उन्होंने कहा कि आज एक बार फिर हरियाणवी फिल्म उद्योग उसी दौर में है और दो दशकों से शांत पड़े हरियाणवी फिल्म उद्योग को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से प्रभाकर फिल्म्स एक नई पारी की शुरूआत करने जा रहा है।












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