अन्‍ना अभियान से फायदे में बीजेपी

Social Activist Anna Hazare
बेंगलूरु। भारतीय जनता पार्टी में शायद ही कोई ऐसी शख्सियत होगी जो अपनी दम पर वोटरों को अपनी तरफ मोड़ सके। आने वाले कुछ महीनों में 5 राज्‍यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। जिसको लेकर पार्टी असमंजस में है कि वह किसे सामने लाए और किसे पीछे करे। नेतृत्‍व की कमी वाली बीजेपी को एक ऐसा नेतृत्‍व मिल गया है जिसका इस पार्टी से ही कोई लेना देना नहीं है। फिर भी उनकी मुहिम से बीजेपी आगामी चुनावों में फायदे में रहेगी। यह मुहिम किसी और की नहीं बल्कि लोकपाल बिल के लिए लड़ाई लड़ने वाले अन्‍ना हजारे की है। अन्‍ना हजारे हर उस राज्‍य का दौरा करेंगे जहां चुनाव होने हैं। इतना ही नहीं अन्‍ना हजारे वोटरों से अपील करेंगे कि कांग्रेस को वोट न करें।

हमारे देश में इस समय 2 ही पार्टियां राष्‍ट्रीय स्‍तर पर खड़ी हो पाई हैं। पहली है कांग्रेस और दूसरी है भारतीय जनता पार्टी। जिस वजह से हर चुनाव में ये दोनों पार्टियां ही आमने सामने होती हैं। ऐसे में एक पार्टी को अन्‍ना हजारे के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वह पार्टी है कांग्रेस। इसका मतलब है कि अगर कांग्रेस को नुकसान हुआ तो इसक सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को पहुंचेगा। इस समय हरियाणा में उपचुनाव हो रहे हैं। अन्‍ना हजारे ने अपनी म‍ुहिम यहीं से शुरू कर दी है। उन्‍होंने वोटरों से अपील की है कि वे कांग्रेस का साथ न दें।

अगले साल 5 राज्‍यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की बात की जाए तो ये चुनाव मणिपुर, गुजरात, उत्‍तरखंड, गोवा, उत्‍तर प्रदेश और पंजाब में होंगे। इन पाचों राज्‍यों में चुनावी समीकरण की बात की जाए तो उत्‍तर प्रदेश को छोड़ दिया जाए तो जंग बीजेपी और कांग्रेस के बीच है। इस समय मणिपुर में कांग्रेस की सरकार, गुजरात में बीजेपी, गोवा में कांग्रेस, पंजाब में बीजेपी और अकाली दल के गठबंधन की सरकार और उत्‍तराखंड में बीजेपी की सरकार है। उत्‍तर प्रदेश में बहुजन समाजवादी पार्टी की सरकार है और इस राज्‍य में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही वापसी के लिए संघर्ष कर रही हैं।

अन्‍ना ऐलान कर चुके हैं कि वे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इन सभी 5 राज्‍यों का दौरा करेंगे। यहां पहुंचकर वे भ्रष्‍टाचार का साथ देने वाली कांग्रेस के खिलाफ एक तरह अभियान चलाएंगे। इन विधानसभा में जीत लहराने वाली पार्टी की जीत का रास्‍ता 2014 में होने वाले लोकसभा में तय होगा। 2004 के बाद केंद्र की राजनीति में वापसी के लिए संघर्ष कर रही बीजेपी के लिए यह सुनहरा मौका साबित हो सकता है। अगर अन्‍ना हजारे का यह कांग्रेस की खिलाफत वाला मिशन कामयाब रहा तो शायद बीजपी लगभग एक दशक बाद केंद्र की राजीनीति की सत्‍ता में वापस आने का सुख भोग सके।

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