V Vikramraju: क्रिकेट जगत में शोक की लहर, दिग्गज अंपायर का निधन, IND-AUS मैच में दिया था ऐतिहासिक फैसला
V Vikramraju Dies: साल 1986 के भारत-ऑस्ट्रेलिया ऐतिहासिक टाई टेस्ट के मुख्य गवाह रहे पूर्व भारतीय अंपायर वी विक्रमराजू (V Vikramraju) का 92 वर्ष की उम्र में बेंगलुरु में निधन हो गया। टेस्ट क्रिकेट के 150 साल से ज्यादा के इतिहास में हुए महज दो टाई मुकाबलों में से एक का फैसला उन्हीं की उंगली उठने से तय हुआ था, जिसने उन्हें हमेशा के लिए अमर बना दिया।
क्रिकेट इतिहास में दर्ज रहेगा नाम (V Vikramraju Dies)
क्रिकेट इतिहास में उनका नाम हमेशा के लिए दर्ज रहेगा, क्योंकि उनके एक फैसले ने टेस्ट क्रिकेट के 150 से अधिक वर्षों के इतिहास का दूसरा सबसे यादगार टाई मुकाबला तय किया था। विक्रमराजू का वह फैसला क्रिकेट की उन कड़ियों में से है, जिसने अंपायरिंग के दबाव और खेल के रोमांच को एक नई परिभाषा दी।

चेपॉक में खेला गया था वो ऐतिहासिक मुकाबला
सितंबर 1986 में चेन्नई (तब मद्रास) के एमए चिदंबरम (चेपॉक) स्टेडियम में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सीरीज का पहला टेस्ट मैच खेला जा रहा था। मैच के आखिरी दिन ऑस्ट्रेलिया के कप्तान एलन बॉर्डर ने अपनी दूसरी पारी 170/5 पर घोषित कर भारत के सामने जीत के लिए 90 ओवरों में 348 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। सुनील गावस्कर के शानदार 90 रनों और मोहम्मद अजहरुद्दीन के 42 रनों की बदौलत भारत एक समय 251/4 पर बेहद मजबूत स्थिति में था। लेकिन चेन्नई की उमस और भीषण गर्मी के बीच मैच जैसे-जैसे आखिरी ओवरों की तरफ बढ़ा, रोमांच और तनाव चरम पर पहुंच गया।
विक्रमराजू का वो फैसला जो हमेशा फैंस को रहेगा याद
जब भारत को जीत के लिए केवल 17 रनों की दरकार थी तब चेतन शर्मा (23) आउट हुए। इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर्स रे ब्राइट और ग्रेग मैथ्यूज ने लगातार विकेट लेकर मैच का पासा पलट दिया। भारत का स्कोर 9 विकेट पर 344 रन था और जीत के लिए 4 रन चाहिए थे। क्रीज पर रवि शास्त्री के साथ आखिरी बल्लेबाज मनिंदर सिंह मौजूद थे।
मैच के आखिरी ओवर की तीसरी गेंद पर रवि शास्त्री ने सिंगल लेकर स्कोर बराबर कर दिया। अब भारत हार नहीं सकता था, लेकिन पांचवीं गेंद पर मनिंदर सिंह पैड पर गेंद खा बैठे। अंपायर वी विक्रमराजू ने बिना वक्त गंवाए अपनी उंगली खड़ी कर दी और मनिंदर को एलबीडब्ल्यू (LBW) करार दिया। इसके साथ ही पूरा मैच टाई पर समाप्त हुआ।
फैसले पर विवाद: डीआरएस (DRS) से 20 साल दूर था क्रिकेट
विक्रमराजू के इस फैसले पर काफी विवाद भी हुआ। बल्लेबाज मनिंदर सिंह और नॉन-स्ट्राइकर छोर पर खड़े रवि शास्त्री (नाबाद 48) इस फैसले से बेहद नाराज थे। उनका दावा था कि गेंद पैड पर लगने से पहले बल्ले का किनारा ले चुकी थी। रवि शास्त्री तो विरोध दर्ज कराने अंपायरों के कमरे तक पहुंच गए थे। चूंकि उस दौर में डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS) जैसी तकनीक नहीं था, इसलिए अंपायर का फैसला ही अंतिम था। विक्रमराजू ने अपने पूरे जीवन में हमेशा यही स्टैंड रखा कि उनका वह फैसला तकनीकी रूप से बिल्कुल सही था।
हैरानी की बात यह है कि वी विक्रमराजू के करियर का यह केवल दूसरा टेस्ट मैच था। इस ऐतिहासिक और विवादित मैच के बाद वे कभी किसी अन्य टेस्ट मैच में अंपायरिंग करते नहीं दिखे, हालांकि उन्होंने अपने करियर में 5 वनडे अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग की थी।















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