आरटीआई और प्रणव की चिट्ठी के बाद 2जी स्‍पेक्‍ट्रम में फंसे चिदंबरम

Pranab Mukherjee and P Chidambaram
दिल्‍ली। गृहमंत्री पी चिदंबरम की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। 2जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटाले में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वित्‍तमंत्री प्रणव मुखर्जी का कहना है कि अगर चिदंबरम चाहते तो वित्‍तमंत्री पद पर रहते हुए वे 2जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटाले को रोक सकते थे। प्रणव मुखर्जी ने 2जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटाले में पी चिदंबरम की भूमिका की जांच के लिए इसी साल मार्च में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी भी लिखी थी। जिस समय 2जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटाला हुआ था उस समय पी चिदंबरम वित्‍तमंत्री थे।

25 मार्च 2011 को वित्‍त मंत्रालय की तरफ से पीएमओ ऑफिस को 11 पन्‍नों को एक डॉक्‍यूमेंट भेजा गया था। जिसमें 2जी स्‍पेक्‍ट्रम की नीलामी और उसकी कीमत तय संबंधी जानकारियां दी गई थीं। 2जी स्‍पेक्‍ट्रम मामले में जानने के लिए आरटीआई एक्‍ि‍टविस्‍ट अनिल गर्ग ने पीएमओ को चिट्ठी लिखकर इस बारे में जानकारी मांगी थी। वित्‍त मंत्रालय द्वारा पीएमओ को भेजी गई चिट्ठी में चिदंबरम के भी 2जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटाले में शामिल होने की तरफ इशारा किया है।

1 लाख 76 हजार करोड़ रुपए के इस घोटाले में पूर्व दूर संचार मंत्री ए राजा, कनिमोझी जेल की हवा खा रहे हैं। जिसके अलावा दयानिधि मारन भी अपनी कुर्सी खो चुके हैं। पहले यूपीए गठबंधन पार्टियों के इस मामले में शामिल होने की बात कहकर इस मामले से किनारा करता रहा है लेकिन अब कांग्रेस पार्टी के अपने नेता ही निशाने पर हैं। प्रणव की चिट्ठी ने कांग्रेस की अंदर की लड़ाई को जग जाहिर कर दिया है। जिसमें सीधे तौर पर 2जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटाले में पी चिदंबरम को आरोपी बनाया जा रहा है।

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