विधानसभा चुनाव को लेकर बढ़ी यूपी में तपिश

भाजपा के एक बड़े नेता ने वन इंडिया को बताया कि यूपी में उम्मीदवार केवल सर्वे के आधार पर चयनित नहीं किए जाएंगे बल्कि उनका चयन संगठन की राय, सामाजिक समीकरण व प्रतिद्वंदी उम्मीदवार को देखकर ही किया जाएगा। वैसे यूपी में जातीय समीकरण को भी झुठलाया नहीं जा सकता। बताया जा रहा है कि अब अगले हफ्ते प्रदेश के छह क्षेत्रों की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक होगी और उस बैठक में हर सीट के लिए पैनल तैयार किया जाएगा। इसके बाद प्रदेश चुनाव समिति के सामने इन नामों को लाया जाएगा। पार्टी पहली सूची में कम से कम सौ उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लगाना चाहती है। हालांकि पहली सूची में उसे कुछ ज्यादा मशकत तो नहीं करनी पड़ेगी क्योंकि इस सूची में उन लोगों के नाम होंगे जो या तो विधायकी जीते हुए हैं या पार्टी के बड़े नाम हैं।
सूत्रों का कहना है कि पार्टी का प्रदेश में संगठन भी कमजोर हुआ है इसलिए पार्टी को जीताऊ उम्मीदवार नहीं मिल पा रहे हैं जिससे पार्टी काफी हतोत्साहित है। प्रदेश के नेता जातीय समीकरणों से भी उबर नहीं उठ पा रहे हैं। ऐसे में सर्वे के आधार पर टिकट तय करने की रणनीति धरी रह गई है। आपको बता दें कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने साफ कर दिया था कि टिकट केवल सर्वे के आधार पर दिए जाएंगे। इसलिए लोग अपने क्षेत्रों में जाकर काम करें, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पा रहा है। दरअसल बड़े नेताओं की अपनी पसंद तो है ही, साथ ही जातीय समीकरण व प्रतिद्वंदी उम्मीदवार भी काफी अहम हैं। अब देखना है कि भाजपा किस आधार पर अपने उम्मीदवारों का चयन करती है। हालांकि इसके लिए पार्टी के बड़ों नेताओं को नाकों चने चबाने पड़ सकते हैं।












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