अमिताभ-अमर की दोस्ती बीता हुआ कल
हमसफर, हमसाया बनें अमर-अमिताभ के रिश्तों की देन थी कि अमिताभ बाराबंकी में किसान बन गये और ऐश्वर्या राय बच्चन यूपी की चहेती बहू जिनके नाम पर स्कूल खोलने की बातें होने लगी, हां ये और बात है कि वो स्कूल आज तक नहीं खुला और ना उम्मीद है कि वो कभी खुलेगा भी। ये वो ही अमर सिंह हैं जिन्होंने अमिताभ को दिवालिया होने से बचाया था। लेकिन आज अमर सिंह के बुरे दौर में अमिताभ साथ नहीं है। वो खराब स्वास्थ्य से जूझ रहे हैं,कैश फॉर वोट मामले में वो तिहाड़ जेल की हवा खा रहे हैं और अमिताभ हैं कि उनके नाम पर चुप्पी साधे हुए हैं।
मुंबई के एक समारोह में जब अमिताभ से उनके छोटे भाई के बारे में पूछा गया तो अमिताभ बंगले झांकने लगे। उनसे मुंह से ना तो अच्छा और ना ही कोई बुरा शब्द अमर सिंह के लिए निकला क्योंकि अमिताभ जानते थे कि अगर वो कुछ कहेगें तो बवाल मच जायेगा इसलिए अपनी शिष्टता का परिचय देते हुए सदी का महानायक चुप्पी साध बैठा। लेकिन ये बातें सिर्फ ये सोचने पर मजबूर होती है कि क्या वाकई में फिल्म जगत और राजनीति के धरातल में रिश्ते अवसरवादी होते हैं।
आखिर ऐसा क्या हो गया कि आज दो दोस्त अजनबी हो गये हैं, जरूरत से ज्यादा बोलने वाले और मुलायम के खिलाफ आग उलगने वाले अमर सिंह भी इस रिश्ते पर चुप हैं और बच्चन परिवार भी मौन है लेकिन सबको पता है कि रिश्तों की मिठास खो चुकी है लेकिन सब ये जानना भी चाहते हैं कि आखिर इसका कारण क्या हैं। आखिर दोनों ही लोग ऐसे कौन से राज एक-दूसरे के छिपाये बैठ हैं जिन्हें खोलना नहीं चाहते हैं। लेकिन इतना तो तय है कि दोनों ही परिवार वालों के हाथ में एक-दूसरे की कमजोरी बंद है, वो भंलि-भांति जानते हैं कि अगर किसी ने भी मुंह खोला तो दूसरे का दामन दागदार होने में वक्त नहीं लगेगा।
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