विदेशी एजेंसियों की आस पर टिकी दिल्ली विस्फोट की जांच

सूत्रों ने बताया कि इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकियों की मोबाइल पर बातचीत का अब तक कोई सबूत नहीं मिला है। इसलिए भारतीय एजेंसियों को शक है कि आतंकी स्काइप बेवसाइट के माध्यम से एक दूसरे के साथ जु़ड़े हुए थे। जिसके बारे में देशी एजेंसियां अज्ञान हैं। यही कारण है कि इसके लिए अमेरिकी एजेंसियों सीआईए और एफबीआई से मदद की गुहार लगाई गई है। हालांकि इस इन विदेशी एजेंसियों ने अभी तक भारत को इस बाबत कोई स्पष्ट संदेशा नहीं दिया है। वैसे मुंबई बम धमाके में अमेरिकी एजेंसियों ने सहायता की पेशकश की थी।
उधर, खुफिया एजेंसियों ने इंडियन मुजाहिद्दीन के मेल के विश्लेषण के बाद अपनी जांच उत्तर प्रदेश पर नजरें टिका दी हैं। उत्तर प्रदेश की एटीएस और एनआईए के अधिकारी लगातार संपर्क में बने हुए हैं। सूत्रों ने बताया कि इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकियों का पता लगाने के लिए राज्य की खुफिया जेलों में बंद आतंकियों से मिलने वालों की पड़ताल में जुटी हुई है। वहीं, फोरेंसिक विशेषज्ञों को मौके से मिले मोबाइल के टुकड़ों ने हैरानी में डाल दिया है। इन टुकड़ों पर विस्फोटक पाया गया है। इससे इस बात की आशंका व्यक्त की जा रही है कि विस्फोट मोबाइल के जरिए तो नहीं किए गए हैं।
उधर, किश्तवाड़ के इंटरनेट कैफे से हमले के दिन किए गए ईमेल को एनआईए अब गंभीरता से नहीं ले रही है। एक अधिकारी ने बताया कि हूजी की तरफ से किए इस मेल में हमले की जिम्मेदारी भले ली गई हो, लेकिन विस्फोट में हूजी का हाथ होने का अब तक कोई संकेत नहीं मिला है। इसके अलावा एजेंसियां हाईकोर्ट हमले के दिन बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और खाड़ी के देशों में किए गए पांच फोन काल की पड़ताल भी कर रही है।












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